Edited By jyoti choudhary,Updated: 11 Jul, 2022 06:08 PM

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) का प्रतिभूतिकरण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में लगभग दोगुना होकर 33,000 करोड़ रुपये हो गया। इक्रा रेटिंग्स ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा कि इस तरह के लेनदेन
मुंबईः गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) का प्रतिभूतिकरण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में लगभग दोगुना होकर 33,000 करोड़ रुपये हो गया। इक्रा रेटिंग्स ने सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह कहा कि इस तरह के लेनदेन की मात्रा वित्त वर्ष 2022-23 में 1.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक होने की उम्मीद है। प्रतिभूतिकरण से आशय संपत्ति खासकर ऋण को बिक्री योग्य संपत्तियों में बदलने से है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही में प्रतिभूतिकरण की मात्रा 17,200 करोड़ रुपए थी। इस तरह समीक्षाधीन तिमाही में लगभग 1.9 गुनी बढ़ोतरी हुई। यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही के मुकाबले 4.4 गुना अधिक है।
इक्रा रेटिंग्स के उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (पुनर्गठित वित्त रेटिंग) अभिषेक दफरिया ने कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही में प्रतिभूतिकरण की मात्रा वित्त वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही के मुकाबले लगभग दोगुनी थी। ऋण की मांग में वृद्धि के साथ वित्त वर्ष 2021-22 की चौथी तिमाही में एनबीएफसी और एचएफसी के लिए वितरण में बढ़ोतरी हुई और चालू वित्त की पहली तिमाही में ये रुझान जारी रहे।''