Banking News: RBI के फैसले के बाद बैंकिंग सेक्टर में हलचल, PNB-BoB-BoI समेत कई बैंकों ने महंगा किया लोन

Edited By Updated: 08 Oct, 2026 11:32 AM

several banks including pnb and bob have made loans costlier

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद देश के कई बैंकों ने लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बड़े बैंकों ने रेपो से जुड़ी

नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद देश के कई बैंकों ने लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB), इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत कई बड़े बैंकों ने रेपो से जुड़ी अपनी बेंचमार्क लेंडिंग रेट में 0.25 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। इससे इन बैंकों से लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है।

रेपो रेट बढ़कर 5.50%

RBI ने बुधवार को रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। करीब चार साल बाद रेपो रेट में यह पहली बढ़ोतरी है। महंगाई और रुपए की कमजोरी के बीच केंद्रीय बैंक ने आगे भी दरों को लेकर सख्त रुख के संकेत दिए हैं।

PNB ने RLLR बढ़ाकर 8.35% किया

PNB ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि रेपो रेट बढ़ने के बाद उसने रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 8.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत कर दिया है। नई दर 8 अक्टूबर से लागू होगी। हालांकि, बैंक ने MCLR और बेस रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।

इन सरकारी बैंकों ने भी बढ़ाईं दरें

इंडियन बैंक ने अपनी रेपो लिंक्ड बेंचमार्क लेंडिंग रेट (RBLR) को 7.95 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.20 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने रेपो आधारित लेंडिंग रेट को 7.90 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत किया है।

वहीं, बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपनी RBLR बढ़ाकर 8.35 प्रतिशत कर दी है। इन सभी नई दरों को 8 अक्टूबर से लागू किया जाएगा।

प्राइवेट बैंक ने भी बढ़ाई ब्याज दर

तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक ने भी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट को 8.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.50 प्रतिशत कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य बैंक और वित्तीय संस्थान भी RBI के फैसले के अनुरूप अपनी बेंचमार्क लेंडिंग रेट में बदलाव कर सकते हैं।

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी से बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर नए और फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा लोन की ब्याज दरों पर पड़ता है। 

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