Edited By Mansa Devi,Updated: 18 Mar, 2026 03:31 PM

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की रसोई गैस (LPG) सप्लाई चैन पर बड़ा असर डाला है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है, असुरक्षित हो गया है।
नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने भारत की रसोई गैस (LPG) सप्लाई चैन पर बड़ा असर डाला है। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक है, असुरक्षित हो गया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का करीब 60 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत गैस इसी मार्ग से आती है। ऐसे में सप्लाई में किसी भी व्यवधान की स्थिति में घरेलू बाजार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
LPG खपत और आयात का हाल
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2026 में भारत की एलपीजी खपत 2822 मीट्रिक टन रही। जनवरी 2026 में यह खपत 3034 मीट्रिक टन और दिसंबर 2025 में 3068 मीट्रिक टन थी। कुल मांग का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात किया जाता है, जो मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है।
पश्चिम एशिया संघर्ष और सप्लाई की चिंता
पश्चिम एशिया में हाल ही में तनाव और संघर्ष बढ़ने के कारण समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की अफवाहों ने स्थिति और गंभीर कर दी है। भारत की गैस आयात निर्भरता को देखते हुए सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के कड़े निर्देश दिए हैं। अब घरेलू एलपीजी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता
सरकार ने साफ किया है कि बढ़ी हुई गैस का पहला अधिकार घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा। साथ ही, एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सख्त निगरानी के आदेश जारी किए गए हैं। युद्ध और संकट की खबरों के बीच कुछ स्थानों पर लोग अनावश्यक रूप से सिलेंडर स्टॉक कर रहे हैं, जिसे रोकने के लिए प्रशासन सतर्क है।
गुजरात पहुंचे 'शिवालिक' और 'नंदा देवी'
सप्लाई संकट के बीच दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाजों, 'शिवालिक' और 'नंदा देवी', का गुजरात के बंदरगाहों पर सफल आगमन देश के लिए बड़ी राहत है। 'शिवालिक' मुंद्रा पोर्ट और 'नंदा देवी' वाडिनार पोर्ट पर पहुंच चुकी हैं। इन जहाजों में कुल मिलाकर लगभग 92,000 मीट्रिक टन एलपीजी है। तकनीकी हिसाब से यह मात्रा देश के 64 लाख से ज्यादा एलपीजी सिलेंडरों को भरने के लिए पर्याप्त है।