Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 Jan, 2026 01:59 PM

निवेश की दुनिया में लंबे समय से सोना और चांदी को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता रहा है। महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और बाजार की उठापटक के दौर में निवेशक आमतौर पर इन्हीं धातुओं का रुख करते हैं लेकिन साल 2025 में एक ऐसी कीमती धातु ने चुपचाप जबरदस्त...
बिजनेस डेस्कः निवेश की दुनिया में लंबे समय से सोना और चांदी को सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता रहा है। महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और बाजार की उठापटक के दौर में निवेशक आमतौर पर इन्हीं धातुओं का रुख करते हैं लेकिन साल 2025 में एक ऐसी कीमती धातु ने चुपचाप जबरदस्त कमाल कर दिया, जिसने सोना-चांदी दोनों को पीछे छोड़ दिया है। हम बात कर रहे हैं प्लेटिनम की।
बिना ज्यादा चर्चा में रहे प्लेटिनम ने इस साल निवेशकों को शानदार रिटर्न देकर सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। आइए समझते हैं कि प्लेटिनम की कीमतों में यह तूफानी तेजी क्यों आई है।
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रिटर्न में सोना-चांदी से कहीं आगे निकला प्लेटिनम
पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्लेटिनम की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। जहां एक साल पहले इसकी कीमत करीब 900–950 डॉलर प्रति औंस थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 2,470 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है।
इस दौरान प्लेटिनम ने निवेशकों को 150 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है। वहीं, इसी अवधि में सोना और चांदी की कीमतों में लगभग 40 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। साफ है कि रिटर्न के मामले में प्लेटिनम ने पारंपरिक सुरक्षित धातुओं को पीछे छोड़ दिया है।
प्लेटिनम की तेजी के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें?
प्लेटिनम की कीमतों में आई इस तेज़ी की सबसे बड़ी वजह इसकी सीमित सप्लाई है। यह धातु दुनिया में बेहद कम मात्रा में पाई जाती है, जबकि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। एक तरफ खनन सीमित है, दूसरी ओर औद्योगिक उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। सप्लाई और डिमांड के इसी असंतुलन ने प्लेटिनम की कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।
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ऑटोमोबाइल और क्लीन एनर्जी सेक्टर से मिल रहा मजबूत सपोर्ट
प्लेटिनम की सबसे ज्यादा मांग ऑटोमोबाइल सेक्टर से आती है। वाहनों में इस्तेमाल होने वाले कैटेलिटिक कन्वर्टर में इसका उपयोग प्रदूषण को कम करने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे दुनिया भर में पर्यावरण से जुड़े नियम सख्त हो रहे हैं, प्लेटिनम की मांग भी तेज़ी से बढ़ रही है।
इसके अलावा हाइड्रोजन फ्यूल सेल जैसी क्लीन और फ्यूचर एनर्जी टेक्नोलॉजी में भी प्लेटिनम की भूमिका अहम होती जा रही है। यही वजह है कि निवेशक इसे सिर्फ शॉर्ट टर्म नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म के लिए भी एक मजबूत मेटल के तौर पर देख रहे हैं।