Edited By jyoti choudhary,Updated: 17 Mar, 2026 02:48 PM

वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच शिपिंग फ्यूल ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। सिंगापुर, जो दुनिया का सबसे बड़ा रिफ्यूलिंग शिपिंग हब माना जाता है, वहां फ्यूल ऑयल की कीमतें 2008 और 2022 के पिछले उच्च स्तर को भी पार कर चुकी हैं।
बिजनेस डेस्कः वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच शिपिंग फ्यूल ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। सिंगापुर, जो दुनिया का सबसे बड़ा रिफ्यूलिंग शिपिंग हब माना जाता है, वहां फ्यूल ऑयल की कीमतें 2008 और 2022 के पिछले उच्च स्तर को भी पार कर चुकी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शिपिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले इस ईंधन की कीमत अब 150 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। यह तेजी मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई में बाधाओं के कारण देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से ऊर्जा बाजार पहले ही दबाव में था और अब बढ़ते वैश्विक तनाव (जिसे कुछ विश्लेषक संभावित “तीसरे गल्फ युद्ध” जैसी स्थिति बता रहे हैं) ने सप्लाई को और प्रभावित किया है।
कीमतों में इस उछाल का असर केवल शिपिंग इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक व्यापार, माल ढुलाई लागत और अंततः आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। महंगे फ्यूल के कारण आयात-निर्यात लागत बढ़ेगी, जिससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी इजाफा संभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक महंगाई पर भी इसका दबाव बढ़ सकता है।