Inflation Hike: आम आदमी की रसोई पर महंगाई का तड़का, शाकाहारी थाली 10% और नॉन-वेज 6% महंगी

Edited By Updated: 09 Oct, 2026 12:12 PM

vegetarian thali becomes 10 costlier and non vegetarian thali 6 more expensive

महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई के बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़ गई। वहीं, मांसाहारी थाली

नई दिल्ली: महंगाई का असर अब आम लोगों की रसोई के बजट पर साफ दिखाई देने लगा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की ‘रोटी राइस रेट’ रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़ गई। वहीं, मांसाहारी थाली भी 6 फीसदी महंगी हुई है। सब्जियों, खाद्य तेल, चावल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का खर्च बढ़ा दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल सितंबर में शाकाहारी थाली तैयार करने की लागत 28.1 रुपए थी, जो इस साल बढ़कर 30.8 रुपए हो गई। इसी तरह, मांसाहारी थाली की कीमत 56 रुपए से बढ़कर 59.5 रुपए पहुंच गई। अगस्त की तुलना में सितंबर में वेज थाली 4 फीसदी और नॉन-वेज थाली 3 फीसदी महंगी हुई।

प्याज की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल

रसोई के बजट पर सबसे अधिक असर प्याज की बढ़ती कीमतों का पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में प्याज के दाम सालाना आधार पर 89 फीसदी बढ़कर 53 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 28 रुपए प्रति किलो था। एक महीने में प्याज की कीमतों में 34 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रबी फसल के उत्पादन में गिरावट, कम बारिश और खरीफ फसल की बुआई में देरी के कारण बाजार में प्याज की आवक प्रभावित हुई। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ा।

तेल, चावल और गैस ने भी बढ़ाया खर्च

खाद्य तेल की कीमतें सालाना आधार पर 12 फीसदी और घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 10 फीसदी बढ़े। वहीं, चावल की कीमतों में 8 फीसदी की तेजी आई। इन बढ़ोतरी ने घरेलू रसोई का खर्च और बढ़ा दिया।

मांसाहारी थाली की महंगाई अपेक्षाकृत कम रहने की वजह चिकन की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी है। सितंबर में ब्रॉयलर चिकन के दाम सालाना आधार पर 2 फीसदी बढ़े।

त्योहारों में मिल सकती है राहत

रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर के पहले पखवाड़े में प्याज की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। हालांकि, महीने के अंत तक खरीफ की नई फसल की आवक बढ़ने पर कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है। तब तक आम लोगों को महंगी रसोई का सामना करना पड़ सकता है।

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