Edited By Parveen Kumar,Updated: 31 Jan, 2026 10:06 PM

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर अपने शरीर की बुनियादी जरूरतों को टाल देते हैं। ऑफिस की लगातार मीटिंग्स, स्कूल-कॉलेज की क्लासेस, लंबा सफर, ट्रैफिक या आसपास वॉशरूम की सुविधा न होना- इन हालातों में कई लोग घंटों तक पेशाब रोककर रखते हैं। कई बार लोग...
नेशनल डेस्क : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर अपने शरीर की बुनियादी जरूरतों को टाल देते हैं। ऑफिस की लगातार मीटिंग्स, स्कूल-कॉलेज की क्लासेस, लंबा सफर, ट्रैफिक या आसपास वॉशरूम की सुविधा न होना- इन हालातों में कई लोग घंटों तक पेशाब रोककर रखते हैं। कई बार लोग जानबूझकर भी इसे टालते हैं, यह सोचकर कि थोड़ी देर और सह लिया जाए।
लेकिन शरीर का यह संकेत नजरअंदाज करना धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। खासकर किडनी, ब्लैडर और पूरे मूत्र तंत्र (यूरिनरी सिस्टम) पर इसका सीधा और गहरा असर पड़ता है। मेडिकल एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि बार-बार और लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत भविष्य में बड़ी बीमारियों का कारण बन सकती है।
पेशाब रोकने से किडनी पर कैसे पड़ता है असर
डॉक्टरों के अनुसार, किडनी का काम लगातार खून को फिल्टर करना और शरीर से गंदे तत्वों को यूरिन के जरिए बाहर निकालना होता है। जब व्यक्ति पेशाब नहीं करता, तो यूरिन ब्लैडर में जमा होता जाता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर ब्लैडर पर दबाव बढ़ता है और यह दबाव धीरे-धीरे किडनी तक पहुंच सकता है।
यूरिन के जरिए शरीर से टॉक्सिन्स, बैक्टीरिया और अतिरिक्त नमक बाहर निकलते हैं। पेशाब रोके जाने पर ये हानिकारक तत्व शरीर में ही बने रहते हैं, जिससे किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लगातार दबाव और अतिरिक्त काम की वजह से किडनी की कार्यक्षमता कमजोर हो सकती है और समय के साथ नुकसान स्थायी भी हो सकता है।
पेशाब रोकने से होने वाली संभावित बीमारियां
1. यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) : जब यूरिन लंबे समय तक ब्लैडर में रुका रहता है, तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया तेजी से बढ़ने लगते हैं। इससे मूत्र मार्ग में संक्रमण हो सकता है। UTI के आम लक्षणों में पेशाब के दौरान जलन, बार-बार पेशाब आने की इच्छा, बदबूदार यूरिन, पेट या कमर में दर्द शामिल हैं। महिलाएं इस समस्या से ज्यादा प्रभावित होती हैं, लेकिन पुरुषों में भी इसका खतरा कम नहीं है।
2. किडनी स्टोन (पथरी) : कम पानी पीना और पेशाब रोकना, दोनों मिलकर यूरिन को गाढ़ा बना देते हैं। ऐसे में यूरिन में मौजूद मिनरल्स जमने लगते हैं, जिससे किडनी स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है। पथरी होने पर तेज दर्द, उल्टी, पेशाब में खून आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में सर्जरी या अन्य मेडिकल प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ती है।
3. ब्लैडर की मांसपेशियों पर असर : लगातार पेशाब रोकने से ब्लैडर की मांसपेशियों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है। इससे ब्लैडर कमजोर हो सकता है और पेशाब पर नियंत्रण की समस्या शुरू हो जाती है। कुछ लोगों में पेशाब अपने आप निकल जाना, बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत या ब्लैडर ठीक से खाली न होने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं।
4. पहले से बीमार लोगों के लिए ज्यादा जोखिम : कुछ लोगों के लिए पेशाब रोकना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। जैसे-प्रोस्टेट की समस्या से जूझ रहे पुरुष, डायबिटीज के मरीज, पहले से किडनी रोग से पीड़ित लोग या जिनमें यूरिन रुकने की समस्या रहती है। इन लोगों में किडनी खराब होने और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्या है बचाव का तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी शरीर पेशाब का संकेत दे, उसे नजरअंदाज न करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और लंबे समय तक पेशाब रोकने की आदत से बचें। यह छोटी-सी सावधानी किडनी और ब्लैडर को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती है।