Edited By Prachi Sharma,Updated: 31 Jan, 2026 09:03 AM

Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और ज्ञान का एक वैश्विक स्तंभ बन रहा है। हाल ही में इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई 400 साल...
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Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और ज्ञान का एक वैश्विक स्तंभ बन रहा है। हाल ही में इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई 400 साल पुरानी वाल्मीकि रामायण की दुर्लभ प्रति को मंदिर परिसर में स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
राष्ट्रपति भवन से राम जन्मभूमि तक का सफर
सदियों पुरानी यह रामायण अब तक देश की सर्वोच्च सांस्कृतिक धरोहर के रूप में राष्ट्रपति भवन में संरक्षित थी। अब इसे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया गया है। इसका उद्देश्य इस अनमोल ग्रंथ को भगवान राम की जन्मस्थली पर लाकर भक्तों और शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाना है।
दुर्लभता और शैक्षणिक महत्व
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, यह प्रति केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा सौंपी गई इस रामायण में मूल श्लोकों के साथ-साथ अत्यंत महत्वपूर्ण व्याख्याएँ भी दर्ज हैं, जो इसे दार्शनिक और अकादमिक दृष्टि से अद्वितीय बनाती हैं।
भविष्य की योजना:
मंदिर ट्रस्ट ने एक दूरगामी विजन तैयार किया है:
सार्वजनिक आह्वान: जल्द ही एक सूचना जारी की जाएगी, जिससे लोग अपने पास मौजूद रामकथा से जुड़ी प्राचीन पांडुलिपियों या दुर्लभ वस्तुओं को ट्रस्ट को सौंप सकेंगे।
विशेषज्ञों की निगरानी: प्राप्त होने वाली हर सामग्री की ऐतिहासिक और वैज्ञानिक जांच एक एक्सपर्ट कमेटी करेगी।
स्थापना: केवल प्रामाणिक और अत्यंत प्राचीन धरोहरों को ही गर्भगृह परिसर में ससम्मान जगह दी जाएगी।
ग्रंथों के संरक्षण के साथ-साथ मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापित करने की भी योजना है। माना जाता है कि यह यंत्र आध्यात्मिक शक्ति का पुंज है, जिसकी स्थापना से मंदिर की गरिमा और ऊर्जा में और अधिक वृद्धि होगी। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को न केवल प्रभु राम के दर्शन होंगे, बल्कि उन्हें भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासतों को समझने का भी अवसर मिलेगा।