Edited By Prachi Sharma,Updated: 25 Jan, 2026 09:25 AM

Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या से एक अभूतपूर्व पहल ने जन्म लिया है, जिसका उद्देश्य सनातन परंपरा और प्रभु श्रीराम की आस्था को वैश्विक पहचान दिलाना है। राम मंदिर के शिखर पर प्रतिष्ठित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि...
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Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या से एक अभूतपूर्व पहल ने जन्म लिया है, जिसका उद्देश्य सनातन परंपरा और प्रभु श्रीराम की आस्था को वैश्विक पहचान दिलाना है। राम मंदिर के शिखर पर प्रतिष्ठित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे विश्व के सातों महाद्वीपों में ले जाकर फहराने का संकल्प लिया गया है। इस अभियान को आस्था के साथ संस्कृति के प्रसार का माध्यम माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत अयोध्या में धार्मिक विधि-विधानों, मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ की गई। संतों, महंतों और बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति ने इस अवसर को विशेष बना दिया। जो ध्वज भविष्य में राम मंदिर की शोभा बढ़ाएगा, वही ध्वज अब पहले दुनिया की यात्रा पर निकला है, ताकि भारतीय सभ्यता और सनातन विचारधारा का संदेश हर देश तक पहुंच सके।
इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व हरियाणा के हिसार निवासी और अनुभवी पर्वतारोही नरेंद्र कुमार कर रहे हैं। उनके अनुसार यह धर्म ध्वज किसी एक स्थान का प्रतीक नहीं बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों की पहचान है। उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक यह ध्वज पृथ्वी के सभी महाद्वीपों पर लहराता दिखाई दे।
नरेंद्र कुमार ने जानकारी दी कि इस यात्रा का पहला पड़ाव नेपाल रहा, जहां 21 दिसंबर को अभियान का शुभारंभ हुआ और 29 दिसंबर को वहां धर्म ध्वज स्थापित किया गया। इसके बाद यह यात्रा क्रमशः अन्य देशों और महाद्वीपों की ओर बढ़ेगी। इस पूरे प्रयास को अयोध्या से विश्व पटल तक पहुँचने वाली एक विशेष आध्यात्मिक यात्रा के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
यह अभियान केवल धार्मिक सीमाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक सोच भी जुड़ी हुई है। नरेंद्र कुमार का मानना है कि आधुनिक दौर में युवा अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। इस पहल के माध्यम से युवाओं को संस्कार, धर्म और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना है। उनका जीवन आज भी मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और त्याग का संदेश देता है। अयोध्या से आरंभ हुई यह धर्म ध्वज यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है और आने वाले समय में जब यह ध्वज सातों महाद्वीपों पर फहराएगा, तब राम मंदिर और सनातन संस्कृति की भावना विश्वभर में प्रतिध्वनित होगी।