Edited By Sarita Thapa,Updated: 05 Jan, 2026 10:42 AM

वृंदावन के सुप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में एक बार फिर परंपराओं और सेवा पद्धति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद का मुख्य कारण ठाकुरजी का बालाजी के रूप में किया गया शृंगार है।
Banke Bihari Balaji Shringar controversy : वृंदावन के सुप्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में एक बार फिर परंपराओं और सेवा पद्धति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बार विवाद का मुख्य कारण ठाकुरजी का बालाजी के रूप में किया गया शृंगार है। रविवार 5 जनवरी 2026 की सुबह जब बांके बिहारी मंदिर के पट खुले, तो श्रद्धालु अपने आराध्य का दर्शन कर मंत्रमुग्ध हो गए। ठाकुरजी को बालाजी के रूप में सजाया गया था। उनके सिर पर चांदी का मुकुट और दक्षिण भारतीय शैली का शृंगार था। जहां आम भक्त इस अनूठे स्वरूप को देखकर निहाल थे, वहीं मंदिर के अन्य सेवायतों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
संप्रदाय और परंपरा का उल्लंघन
सेवायतों का कहना है कि बांकेबिहारी मंदिर विष्णु स्वामी संप्रदाय की परंपराओं का पालन करता है। लेकिन, ठाकुरजी का यह शृंगार रामानंद संप्रदाय की शैली में किया गया। सेवायतों के अनुसार, मंदिर की अपनी एक निश्चित मर्यादा और पद्धति है, जिसे बदला नहीं जा सकता।
सेवा पद्धति में बदलाव का आरोप
विरोध कर रहे गोस्वामियों का तर्क है कि बांकेबिहारी जी नित्य विहार की पद्धति से सेवा पाते हैं। उन्हें किसी अन्य देवता या स्वरूप के रूप में सजाना मंदिर की मूल आत्मा और सदियों पुरानी परंपरा के विरुद्ध है। इसे मंदिर की सेवा नियमावली का उल्लंघन बताया गया है।
हाई-पावर्ड कमेटी और प्रशासन पर सवाल
मंदिर में हाल के दिनों में कई प्रशासनिक बदलाव हुए हैं। सेवायतों का एक वर्ग इस शृंगार को भी व्यवस्थागत चूक या बिना विमर्श के लिया गया फैसला मान रहा है।
भक्तों और सेवायतों की प्रतिक्रिया
अधिकांश भक्त इस विवाद से अनजान थे और वे ठाकुरजी के दिव्य दर्शन पाकर खुश नजर आए। गोस्वामी समाज में इस बात को लेकर गहरा रोष है। उनका कहना है कि अगर परंपराओं के साथ इसी तरह का खिलवाड़ होता रहा, तो मंदिर की मौलिकता समाप्त हो जाएगी।
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