Basant Panchami 2026 Katha : बसंत पंचमी के दिन पढ़ें यह कथा, मां सरस्वती करेंगी ज्ञान और सफलता की वर्षा

Edited By Updated: 22 Jan, 2026 03:31 PM

Basant Panchami 2026 Katha : माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को पूरे भारत में बसंत पंचमी का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन है ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां सरस्वती का...

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Basant Panchami 2026 Katha : माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को पूरे भारत में बसंत पंचमी का त्योहार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन है ज्ञान, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती की आराधना का। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां सरस्वती का प्राकट्य कैसे हुआ ? और क्यों भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें सबसे पहले पूजा था ? 

पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो उन्हें चारों ओर मौन और नीरसता दिखाई दी। मनुष्य और जीव-जंतु सब शांत थे। इस सन्नाटे को दूर करने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल निकालकर पृथ्वी पर छिड़का। जल छिड़कते ही एक अद्भुत शक्ति प्रकट हुई चार भुजाओं वाली एक सुंदर देवी ! उनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में माला, तीसरे में पुस्तक और चौथे हाथ में वर मुद्रा थी।

Basant Panchami 2026 Katha

ब्रह्मा जी ने उन्हें सरस्वती पुकारा। देवी ने जैसे ही अपनी वीणा के तार झंकृत किए, पूरी सृष्टि में संगीत गूंज उठा। नदियां कलकल कर बहने लगीं, हवाओं में सुर घुल गए और हर जीव को वाणी मिल गई। तभी से उन्हें बुद्धि और संगीत की देवी के रूप में पूजा जाने लगा।

एक अन्य कथा के अनुसार, जब देवी सरस्वती ने भगवान श्री कृष्ण के रूप को देखा, तो वे उन पर मोहित हो गईं और उन्हें पति रूप में पाने की इच्छा की। लेकिन श्री कृष्ण राधा रानी के प्रति समर्पित थे। सरस्वती जी को प्रसन्न करने के लिए उन्होंने वरदान दिया कि आज से माघ शुक्ल पंचमी को पूरा विश्व तुम्हारी विद्या और ज्ञान की देवी के रूप में पूजा करेगा।  स्वयं भगवान कृष्ण ने सबसे पहले उनकी पूजा की, और तब से यह परंपरा चली आ रही है।

मां सरस्वती के बारे में देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मान्यताएं हैं। पश्चिमी भारत में उन्हें भगवान सूर्य की पुत्री माना जाता है और कार्तिकेय जी के साथ उनका विवाह जोड़ा जाता है। वहीं पूर्वी भारत में उन्हें माता पार्वती की पुत्री माना जाता है। मान्यता है कि इस पावन कथा को सुनने मात्र से देवी सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और बुद्धि प्रखर होती है।

Basant Panchami 2026 Katha

बता दें, बसंत पंचमी का यह पावन दिन हमें याद दिलाता है कि जीवन में धन-दौलत से भी ऊपर विद्या और संस्कारों का स्थान है। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है। इस दिन पीले वस्त्र पहनने और पीले पकवान बनाने की परंपरा है क्योंकि पीला रंग सुख, शांति और नई ऊर्जा के आगमन का प्रतीक है। इसी दिन कई घरों में छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार भी किया जाता है, ताकि उनके जीवन की शुरुआत ज्ञान की ज्योति के साथ हो।

Basant Panchami 2026 Katha
 

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