Basant Panchami 2026: पढ़ें, सरस्वती पूजा की शुरुआत और पौराणिक इतिहास की पूरी Details

Edited By Updated: 16 Jan, 2026 11:43 AM

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Basant Panchami (Saraswati Puja) 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व न केवल बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, बल्कि विद्या, बुद्धि, वाणी और संगीत की देवी...

Basant Panchami (Saraswati Puja) 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026, शुक्रवार को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व न केवल बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, बल्कि विद्या, बुद्धि, वाणी और संगीत की देवी मां सरस्वती की उपासना का भी विशेष दिन माना जाता है। इसी कारण इसे सरस्वती पूजा और सरस्वती जयंती के नाम से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी से ही विद्या का आरंभ, नए कार्यों की शुरुआत और शुभ संस्कार करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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बसंत पंचमी क्यों मनाई जाती है? (Why is Basant Panchami Celebrated)
बसंत पंचमी पर हुआ था मां सरस्वती का प्राकट्य। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की तो उन्हें संसार में नीरसता और मौन का अनुभव हुआ। तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक दिव्य देवी प्रकट हुईं। देवी के चार हाथ थे एक हाथ में वीणा, एक हाथ में पुस्तक, एक हाथ में माला और एक हाथ वर मुद्रा में था। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुर नाद किया, संपूर्ण सृष्टि में चेतना, संगीत और वाणी का संचार हो गया। यह दिव्य घटना माघ शुक्ल पंचमी के दिन हुई थी, इसलिए इस दिन को मां सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

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ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व
बसंत पंचमी को ऋतुराज बसंत का स्वागत दिवस भी माना जाता है। इस दिन से कड़ाके की ठंड कम होने लगती है। पेड़ों पर नए पत्ते आने लगते हैं। खेतों में सरसों के पीले फूल लहलाने लगते हैं। प्रकृति में चारों ओर पीले रंग की छटा दिखाई देती है, इसलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीले पकवान बनाना और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

प्रेम और सृजन की ऋतु का आरंभ
कुछ क्षेत्रों में बसंत पंचमी के दिन प्रेम के देवता कामदेव और देवी रति की भी पूजा की जाती है। इसी कारण बसंत ऋतु को प्रेम, सौंदर्य और सृजन की ऋतु कहा जाता है। यह समय जीवन में उत्साह, नवीनता और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आता है।

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अबूझ मुहूर्त का विशेष दिन
बसंत पंचमी को हिंदू धर्म में अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस दिन: विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, नया व्यापार और विद्या आरंभ जैसे शुभ कार्य बिना किसी विशेष मुहूर्त के किए जा सकते हैं, क्योंकि इस दिन ग्रह-नक्षत्र स्वाभाविक रूप से शुभ स्थिति में रहते हैं।

बसंत पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
विद्यार्थियों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है
स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में विशेष सरस्वती पूजा होती है
बच्चों को पहली बार अक्षर लेखन कराया जाता है
कलाकार, लेखक और संगीतकार मां सरस्वती की आराधना करते हैं

बसंत पंचमी 2026: क्या करें क्या न करें
क्या करें

मां सरस्वती की पूजा करें
पीले वस्त्र धारण करें
विद्या और कला से जुड़े कार्य प्रारंभ करें

क्या न करें
नकारात्मक विचारों से दूर रहें
अपवित्र स्थान पर पूजा न करें

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