Edited By Sarita Thapa,Updated: 22 Jan, 2026 05:06 PM

हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का दिन केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह चेतना, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित महापर्व है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा जी ने अपनी वाणी से सृष्टि में स्वर और ज्ञान...
Basant Panchami Vastu Tips 2026 : हिंदू धर्म में बसंत पंचमी का दिन केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह चेतना, ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित महापर्व है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा जी ने अपनी वाणी से सृष्टि में स्वर और ज्ञान का संचार किया था। शिक्षा, कला और संगीत से जुड़े लोगों के लिए यह दिन नए संकल्प लेने और मां शारदे का आशीर्वाद पाने का सबसे श्रेष्ठ अवसर होता है। अक्सर हम पूरी श्रद्धा से पूजा तो करते हैं, लेकिन अनजाने में वास्तु के नियमों की अनदेखी कर देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर या शिक्षण संस्थान में मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर की सही दिशा में स्थापना करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही दिशा न केवल सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है, बल्कि यह विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ाने और करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने में भी सहायक होती है। यदि आप भी इस बसंत पंचमी पर अपने घर या ऑफिस में मां सरस्वती की स्थापना करने जा रहे हैं, तो वास्तु के इन सरल नियमों को समझना आपके लिए करियर और पढ़ाई में सफलता के द्वार खोल सकता है। तो आइए जानते हैं कि मां सरस्वती को किस दिशा में विराजमान करना आपके भाग्य के लिए सबसे शुभ रहेगा।
मूर्ति स्थापना के लिए सबसे शुभ दिशा
वास्तु के अनुसार, मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा सबसे उत्तम मानी गई है। ईशान कोण को देवताओं का स्थान कहा जाता है। इस दिशा में मां सरस्वती का मुख होने से घर में सात्विक ऊर्जा का संचार होता है और पढ़ाई में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। यदि उत्तर-पूर्व में जगह न हो, तो आप पूर्व दिशा का चुनाव भी कर सकते हैं।
मुख किस तरफ होना चाहिए ?
पूजा करते समय इस बात का ध्यान रखें कि मां सरस्वती की प्रतिमा का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो, ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है, जो ज्ञान और चेतना का प्रतीक है।

पढ़ाई और कार्यक्षेत्र के लिए खास टिप्स
छात्रों के लिए
छात्रों को अपने स्टडी टेबल के उत्तर-पूर्व भाग में मां सरस्वती की एक छोटी प्रतिमा या 'सरस्वती यंत्र' स्थापित करना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति तेज होती है।
नौकरीपेशा लोगों के लिए
जो लोग नई नौकरी या प्रमोशन की तलाश में हैं, वे अपने वर्क-डेस्क पर सफेद पत्थर की सरस्वती प्रतिमा रखें। ध्यान रहे कि मूर्ति खंडित न हो।
भूलकर भी न करें ये गलतियां
दक्षिण दिशा
कभी भी मां सरस्वती की मूर्ति दक्षिण दिशा में न रखें। यह दिशा यम की मानी जाती है और यहां विद्या की देवी की स्थापना से मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
शयनकक्ष
बेडरूम में मां सरस्वती की मूर्ति रखने से बचना चाहिए। यदि जगह की कमी है, तो उसे किसी पर्दे या कैबिनेट के अंदर सम्मानपूर्वक रखें।
दो मूर्तियां
एक ही स्थान पर मां सरस्वती की दो मूर्तियां कभी न रखें।
शुभ रंग और सजावट
बसंत पंचमी के दिन स्थापना करते समय मूर्ति के नीचे पीला या सफेद वस्त्र बिछाएं। मां सरस्वती को पीले फूल और पीले चावल अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है। यह रंग गुरु ग्रह का प्रतीक है, जो बुद्धि के कारक हैं।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ