Bhagavad Gita Niyam: अगर आप भी करते हैं गीता का पाठ तो ध्यान रखें ये आवश्यक बात

Edited By Updated: 12 Apr, 2024 04:52 PM

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श्रीमद्भागवत गीता हिन्दू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है। महाभारत में श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को जो उपदेश दिए थे वहीं गीता है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक

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Bhagavad Gita: श्रीमद्भागवत गीता हिन्दू धर्म का एक पवित्र ग्रंथ है। महाभारत में श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को जो उपदेश दिए थे वहीं गीता है। गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं जो अपने आप में काफी महत्व रखते हैं। इन्हीं में आत्मा, परमात्मा, भक्ति, कर्म, जीवन वर्णन किया गया है। कहा जा सकता है कि गीता में जीवन का सार है। गीता पढ़ने से व्यक्ति को जीवन जीने की सीख मिलती है। बता दें कि गीता का पाठ करते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।  तो आइए जानते हैं गीता पाठ से जुड़े कुछ नियम। 
 
सबसे पहले आपको बता दें कि भगवत गीता का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है लेकिन गीता का पाठ करने के लिए सुबह का समय सबसे उत्तम माना जाता है क्योंकि इस समय मन, मस्तिष्क और वातावरण में शांति व सकारात्मकता होती है। वहीं गीता का पाठ हमेशा स्नान आदि से निवृत होकर, साफ-सुथरे कपड़े पहनकर ही करना चाहिए। 

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गीता का पाठ करते समय एक और जरूरी बात ध्यान में रखें कि कभी भी जमीन पर या हाथ में रखकर गीता का पाठ नहीं करना चाहिए। साफ-सफाई वाले स्थान और जमीन पर आसन बिछाकर ही गीता का पाठ करना चाहिए। इसी के साथ आपको ये भी बता दें कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गीता को हमेशा लाल कपड़े में लपेटकर ही रखें और पाठ के समय इसे खोले। 

एक और जरूरी नियम बता दें कि भगवत गीता का अध्याय बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, पूरा अध्याय पढ़ने के बाद ही गीता को बंद करें। 

इसके अलावा धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पाठ करते समय बीच-बीच में इधर-उधर की बातें नहीं करनी चाहिए और न ही किसी कार्य के लिए बार-बार उठना चाहिए। 

तो वही गीता के प्रत्येक अध्याय को शुरू करने से पहले और बाद भगवान श्रीकृष्ण और गीता के चरण कमलों को स्पर्श करना चाहिए। 

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आगे आपको बता दें कि गीता को घर में रखने के भी कुछ नियम है। जिस भी स्थान पर आप गीता रख रहे हैं वह स्थान एकदम साफ होना चाहिए। गंदे हाथों से, बिना नहाएं या मासिक धर्म में गीता को स्पर्श नहीं करना चाहिए। 

तो चलिए अब आपको बताते हैं गीता का पाठ करने से व्यक्ति को कौन-कौन से लाभ होते हैं। 

श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से जीवन से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर हो जाती है। पॉजिटिव एनर्जी का संचार होता है। इतना ही नहीं नियमित रूप से गीता का पाठ करने से कॉन्फिडेंस बढ़ता है और व्यक्ति अपने लक्ष्य की ओर ही केंद्रित रहता है। 

वहीं जिन लोगों को हमेशा गुस्सा आता है उन्हें गीता का पाठ करना चाहिए। गीता का पाठ करने से व्यक्ति क्रोध, लालच और मोह, माया से दूर हो जाता है। इन सब से दूर होने के बाद जीवन बहुत शांति और सुख के साथ बीतता है। 

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