Edited By Prachi Sharma,Updated: 21 Mar, 2026 08:28 AM

इंदौर (प.स.): मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने धार जिले के विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर तथा गुरुकुल होने का दावा करने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को सरकार और अन्य प्रतिवादियों को अपनी आपत्तियां पेश करने का निर्देश...
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इंदौर (प.स.): मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने धार जिले के विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में मध्यकालीन जैन मंदिर तथा गुरुकुल होने का दावा करने वाली जनहित याचिका पर शुक्रवार को सरकार और अन्य प्रतिवादियों को अपनी आपत्तियां पेश करने का निर्देश दिया। याचिका में जैन समुदाय को विवादित परिसर में उपासना का अधिकार प्रदान करने की गुहार की गई है।
दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्त्ता सलेकचंद जैन ने यह याचिका ऐसे वक्त दायर की है, जब संभवतः 11वीं सदी के इस परिसर के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर अलग-अलग मुकद्दमे उच्च न्यायालय में पहले ही विचाराधीन हैं। हिंदू पक्ष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए.एस.आई.) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर दावा कर रहा है कि यह स्मारक मूलत: एक प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद करार दे रहा है।
उच्च न्यायालय में जैन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से आपत्ति जताते हुए कहा गया कि यह मुकद्दमा जनहित याचिका के तौर पर चलने लायक नहीं है।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता ने जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 2 अप्रैल की तारीख तय की और प्रतिवादियों से कहा कि वे याचिका पर अपना संक्षिप्त उत्तर या आपत्तियां इस तारीख से पहले पेश करें।