Edited By Sarita Thapa,Updated: 05 Jan, 2026 01:06 PM

आचार्य चाणक्य, जिन्हें हम कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जानते हैं, उनकी नीतियां आज हजारों साल बाद भी उतनी ही प्रभावी हैं जितनी तब थीं। एक पिता या माता के रूप में हम हमेशा अपनी बेटी के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की चिंता करते हैं।
Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य, जिन्हें हम कौटिल्य या विष्णुगुप्त के नाम से भी जानते हैं, उनकी नीतियां आज हजारों साल बाद भी उतनी ही प्रभावी हैं जितनी तब थीं। एक पिता या माता के रूप में हम हमेशा अपनी बेटी के सुरक्षित और सुनहरे भविष्य की चिंता करते हैं। चाणक्य नीति के अनुसार, अगर आप अपनी बेटी को दुनिया की भीड़ में खोने से बचाना चाहते हैं और चाहते हैं कि वह हर मुश्किल अंधेरे में अपना रास्ता खुद खोज ले, तो उसे ये अचूक और जादुई नियम जरूर सिखाएं।
शिक्षा और आत्म-निर्भरता ही सबसे बड़ा कवच
आचार्य चाणक्य का मानना था कि विद्वान सर्वत्र पूज्यते अर्थात् एक शिक्षित व्यक्ति का हर जगह सम्मान होता है। अपनी बेटी को सिर्फ किताबी ज्ञान न दें, बल्कि उसे आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना सिखाएं। जब एक स्त्री शिक्षित और आत्म-निर्भर होती है, तो वह न केवल अपना बल्कि पूरे परिवार का भाग्य बदलने की शक्ति रखती है। उसे सिखाएं कि उसका स्वाभिमान उसकी शिक्षा से आता है, न कि किसी पर निर्भर रहने से।

सही और गलत व्यक्ति की पहचान
संसार में हर कोई मित्र नहीं होता। चाणक्य कहते हैं कि सांप के विष से ज्यादा खतरनाक दुर्जन व्यक्ति का साथ होता है। बेटी को यह सिखाना बहुत जरूरी है कि वह लोगों के मीठे शब्दों पर नहीं, बल्कि उनके व्यवहार पर ध्यान दे। उसे परखने की शक्ति दें ताकि वह धोखेबाजों और सच्चे मित्रों के बीच अंतर कर सके। जो स्त्री लोगों की नीयत भांपना सीख जाती है, वह जीवन के किसी भी अंधेरे मोड़ पर धोखा नहीं खाती।
संकट के समय धैर्य और साहस
जीवन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। चाणक्य नीति कहती है कि संकट के समय ही व्यक्ति के असली चरित्र की परीक्षा होती है।अक्सर मुश्किल समय में लोग टूट जाते हैं। अपनी बेटी को सिखाएं कि कठिन परिस्थितियों में घबराना नहीं, बल्कि धैर्य से काम लेना है। उसे साहसी बनाएं ताकि वह अपनी सुरक्षा खुद कर सके और चुनौतियों का डटकर सामना करे। साहस ही वह मशाल है जो घने अंधेरे में भी रास्ता दिखाती है।

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