Char Dham Yatra 2026 : बदरीनाथ-केदारनाथ में प्रवेश पर नया प्रस्ताव, गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की तैयारी, जानें क्या है पूरा मामला ?

Edited By Updated: 27 Jan, 2026 10:54 AM

char dham yatra 2026

Char Dham Yatra 2026 : श्री बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति अपने अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-हिंदू व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर नया नियम बनाने पर विचार कर रही है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही बोर्ड की बैठक में रखा...

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Char Dham Yatra 2026 : श्री बदरीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति अपने अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-हिंदू व्यक्तियों के प्रवेश को लेकर नया नियम बनाने पर विचार कर रही है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा और उस पर निर्णय लिया जाएगा। इस संभावित फैसले ने उत्तराखंड ही नहीं  बल्कि पूरे देश में चर्चा और बहस को तेज कर दिया है।

मंदिर समिति का तर्क है कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम केवल घूमने-फिरने के स्थान नहीं हैं, बल्कि ये सनातन धर्म और वैदिक परंपरा के अत्यंत प्राचीन और पवित्र केंद्र हैं। समिति का मानना है कि इन स्थलों में प्रवेश को सामान्य नागरिक अधिकार की तरह नहीं देखा जा सकता। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नियम लागू होता है, तो क्या यह सभी गैर-हिंदू समुदायों पर समान रूप से प्रभावी होगा या किसी विशेष वर्ग तक सीमित रहेगा।

हेमंत द्विवेदी ने कहा कि इन दोनों धामों की स्थापना आदि शंकराचार्य ने की थी और ये सनातन संस्कृति के प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लेख करते हुए कहा कि हर धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक मामलों के संचालन का अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार, यह कदम किसी समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि परंपराओं, अनुशासन और पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जैसे मस्जिदों और चर्चों में तय धार्मिक नियम होते हैं, वैसे ही हिंदू तीर्थ स्थलों की भी अपनी मर्यादाएं हैं।

सिख और जैन समुदाय से जुड़े सवालों पर द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी खास धर्म को लेकर नहीं है, बल्कि आस्था और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जो लोग सनातन धर्म में आस्था रखते हैं, उनके लिए बदरीनाथ और केदारनाथ के द्वार खुले हैं। उन्होंने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल  गुरमीत सिंह की उपस्थिति का भी उल्लेख किया, जिसे इसी भावना से जोड़कर देखा गया।

इस विषय पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी पक्षों की राय सुनी जाएगी। मंदिर समिति के अनुसार, संत-महात्माओं, तीर्थ पुरोहितों, धार्मिक संगठनों और स्थानीय संस्थाओं से विचार-विमर्श किया जाएगा, साथ ही पहले से मौजूद कानूनों की भी समीक्षा की जा रही है।

वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने आरोप लगाया कि सरकार दोहरे मापदंड अपना रही है। उनका कहना था कि कई तीर्थ स्थलों पर पहले से ही स्थानीय परंपराएं लागू हैं, लेकिन इस मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रूप दिया जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ऐसा कोई प्रतिबंध लगाया जाता है, तो उसे सभी धर्मों के स्थलों पर समान रूप से लागू किया जाना चाहिए। हरीश रावत ने यह भी कहा कि देश के कई मंदिरों के निर्माण और संरक्षण में गैर-हिंदू समुदायों का योगदान रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, जब अन्य धर्म संवाद और सहभागिता की बात करते हैं, तब यहां प्रतिबंधों पर चर्चा होना चिंता का विषय है।

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