Edited By Niyati Bhandari,Updated: 03 Nov, 2026 01:43 PM

Diwali 2026 Lakshmi Charan Rules: दिवाली पर मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाते समय सही दिशा और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। जानिए, सिंदूर व चावल के आटे से चरण बनाने के धार्मिक नियम।
Diwali 2026 Lakshmi Charan Rules: दिवाली का पावन पर्व हर साल सुख, समृद्धि और नई खुशियों की सौगात लेकर आता है। इस खास अवसर पर धन की देवी मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घरों को विशेष रूप से सजाया और संवारा जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, दिवाली की रात मां लक्ष्मी के आगमन के प्रतीक स्वरूप घर के मुख्य द्वार पर उनके छोटे-छोटे चरण चिह्न (पैरों के निशान) बनाए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा में या अशुद्ध सामग्री से बनाए गए चरण लाभ की जगह नुकसान भी पहुंचा सकते हैं? आइए जानते हैं मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाने से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक नियम और सावधानियां...
कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में झिलमिल दीपों के बीच महालक्ष्मी का क्षीर सागर से धरा पर आगमन होता है। वे घर-घर में घूमकर अपने रहने योग्य स्थान का चयन करती हैं। जहां उनके अनुरूप वातावरण होता है, वहां रूक जाती हैं। लक्ष्मी जी हमारे घर में रूकें इसलिए हम प्रतिवर्ष उनकी विशेष पूजा-उपासना करके उन्हें प्रसन्न करते हैं ताकि हमारा घर वर्ष भर समृद्धि से परिपूर्ण रहे। दीपावली की रात्रि को धन-संपदा की प्राप्ति हेतु लक्ष्मी के पूजन का विधान है। ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात लक्ष्मी जी घर में आती हैं। इसीलिए लोग दहलीज से लेकर घर के अंदर जाते हुए लक्ष्मी जी के पांव बनाते हैं। इसी मान्यता के चलते हम लक्ष्मी जी को स्थाई करने हेतु घर में लक्ष्मी जी के चरणों का प्रतीक लक्ष्मी चरण पादुका स्थापित करते हैं।

शास्त्रों के अनुसार महालक्ष्मी के चरणों में सोलह शुभ चिन्ह होते हैं। यह चिन्ह अष्ट लक्ष्मी के दोनों पावों से उपस्थित 16 (षोडश) चिन्ह है जो के 16 कलाओं का प्रतीक हैं। शास्त्रों में मां लक्ष्मी को षोडशी भी कहकर पुकारा जाता है। ये सोलह कलाएं हैं 1.अन्नमया, 2.प्राणमया, 3.मनोमया, 4.विज्ञानमया, 5.आनंदमया, 6.अतिशयिनी, 7.विपरिनाभिमी, 8.संक्रमिनी, 9.प्रभवि, 10.कुंथिनी, 11.विकासिनी, 12.मर्यदिनी, 13.सन्हालादिनी, 14.आह्लादिनी, 15.परिपूर्ण, 16.स्वरुपवस्थित।

लक्ष्मी चरण पादुका जहां भी स्थापित कि जाती है वहां से समस्याओं का नाश होता है। इसकी स्थापना से धनाभाव खत्म होकर स्थाई धन संपत्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसे मकान, दुकान, आफिस या कहीं भी दरवाजे पर चिपकाना भी शुभ होता है। अष्ठ धातु से निर्मित यह चरण पादुका सुख-समृद्धि हेतु निश्चित ही उपयोगी सामग्री है।

घर में मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न की तस्वीर लगाना शुभ होता है। इसे लगाने से परिवार में चल रही आर्थिक परेशानी से छुटकारा पाया जा सकता है। मां लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाना भी शुभ माना जाता है। इसे चावल के आटे या सफेद रंग से घर के बाहर से अंदर की ओर बनाएं। यह डिज़ाइन लक्ष्मी पदचिन्ह रंगोली के नाम से भी ट्रेंड में है और सकारात्मक ऊर्जा लाती है।

चरण चिह्न बनाते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
चरणों का मुंह हमेशा घर के अंदर की तरफ आता हुआ होना चाहिए। पैरों के निशान कभी भी घर के बाहर की ओर जाते हुए नहीं बनाने चाहिए, क्योंकि इसे धन व वैभव के घर से बाहर जाने का प्रतीक माना जाता है।
किस सामग्री से बनाएं मां लक्ष्मी के चरण?
शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार पर चरण चिह्न बनाने के लिए निम्नलिखित पवित्र सामग्रियों का प्रयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है:
चावल का आटा: पिसान (चावल के आटे) से बने चरण चिह्न घर में अन्न और धन के भंडार भरते हैं।
रोली और सिंदूर: लाल सिंदूर या कुमकुम से बनाए गए चरण चिह्न मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं और इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है।
