Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Nov, 2026 03:54 PM

कुछ ही दिनों में दिवाली आने वाली है और इसके साथ ही सभी घरो में बाज़ारो में दिवाली की रौनक देखने को मिल रही है। लोग अपने घरों को इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स, झालरों, तोरण और फूलों आदि से सजा रहे हैं।
Diwali Nimbu Mirchi Ritual Significance : कुछ ही दिनों में दिवाली आने वाली है और इसके साथ ही सभी घरो में बाज़ारो में दिवाली की रौनक देखने को मिल रही है। लोग अपने घरों को इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स, झालरों, तोरण और फूलों आदि से सजा रहे हैं। लेकिन इन सबसे बीच सभी घरों के मुख्य दरवाजों पर एक चीज़ अक्सर देखने को मिलती है और वह है नींबू-मिर्च। वैसे कोई अपने घर के बाहर नींबू-मिर्च लगाएं या न लगाएं लेकिन ऐसा अक्सर देखा जाता है कि दिवाली के दिन सभी के घरों के बाहर नींबू-मिर्च ज़रूर लटका होता है। लेकिन क्या आप इसके पीछे के कारण के बारे में जानते हैं कि दिवाली से पहले नींबू-मिर्च क्यों लगाई जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा का संबंध माता लक्ष्मी की बड़ी बहन अलक्ष्मी से जोड़ा जाता है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे के रहस्य के बारे में-
मां लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलक्ष्मी को मां लक्ष्मी की बड़ी बहन के रूप में जाना जाता है। जहां एक ओर मां लक्ष्मी धन, सुख-समृद्धि और वैभव की देवी मानी जाती हैं वहीं दूसरी और अलक्ष्मी का संबंध दरिद्रता से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि जिस स्थान पर स्वच्छता और प्रेम होता है वहां मां लक्ष्मी का वास होता है लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत जहां अस्वच्छता, कलह-क्लेश और झगड़े रहते हैं वहां अलक्ष्मी का वास माना जाता है। ऐसे में जब दिवाली के समय होता है तो हर किसी की यही इच्छा रहती है कि घर में मां लक्ष्मी का वास हो इसके लिए लोग दिवाली से पहले घरों की अच्छे से सफाई करते हैं और घरों को सजाते हैं। कहा जाता है कि अलक्ष्मी वहां निवास नहीं करती जहां मां लक्ष्मी का वास होता है इसलिए लोग दीपावली पर मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए दीये जलाते हैं। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र में नींबू-मिर्च को नकारात्मकता दूर करने वाला माना जाता है। कहते हैं कि अगर दरवाज़े पर नींबू-मीर्च टंगा रहे तो इससे घर में बुरी शक्तियांऔर नकारात्मकता का प्रवेश नहीं हो पाता।

नींबू-मिर्च से जुड़ी है यह लोककथा
पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की मीठी और सुगंधित चीज़ों का भोग प्रिय माना जाता है लेकिन वहीं दूसरी ओर अलक्ष्मी को खट्टा, तीखा और कड़वा स्वाद प्रिय माना जाता है। प्रचलित लोक मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दौरान अलक्ष्मी घरों के आसपास आती है। लेकिन घर के बाहर नींबू-मिर्च टंगी होने के कारण अलक्ष्मी घर में प्रवेश नहीं कर पाती और केवल नींबू-मीर्च का खट्टा और तीखा स्वाद ग्रहण कर बाहर से ही चली जाती है। माना जाता है कि इसी वजह से दिवाली पर घर के बाहर नींबू-मीर्च टांगी जाती है ताकि घर में नकारात्मकता, दरिद्रता और दुख घर में प्रवेश न कर सकें और केवल सकारात्मकता और खुशहाली का घर में वास बना रहें।

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