Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Nov, 2026 02:36 PM

Roop Chaudas 2026: नरक चतुर्दशी यानी रूप चौदस पर भक्ति-पूजा से मिलता है बाह्य व आंतरिक सुंदरता का वरदान। जानें यम दीपदान का अचूक मंत्र, वामन अवतार व हनुमान जयंती का धार्मिक महत्व और पूजा विधि।
Roop Chaturdashi 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और छोटी दिवाली के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भक्ति-पूजा करने से व्यक्ति को बाह्य (शारीरिक) तथा आंतरिक सुंदरता एवं रूप का वरदान प्राप्त होता है। इसी कारण इस पावन तिथि को रूप चौदस कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरकासुर नामक दैत्य के वध की खुशी में लोगों ने दीपावली से ठीक एक दिन पहले घी के दीपक जलाकर उत्सव मनाया था। तभी से कार्तिक चतुर्दशी की रात को नरक चौदस और छोटी दिवाली के रूप में मनाए जाने की परंपरा निरंतर चली आ रही है। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों में मां लक्ष्मी जी और भगवान श्री गणेश जी का विधि-विधान से पूजन करते हैं तथा उनसे अपने गृह में आगमन और कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
Stories and Beliefs Of Roop Chaudas रूप चौदस की पौराणिक कथाएं एवं मान्यताएं
रूप चौदस की तिथि कई अन्य महान धार्मिक घटनाओं और अवतारों से भी जुड़ी हुई है:

भगवान वामन अवतार की पूजा
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक चतुर्दशी के दिन ही भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। इसीलिए रूप चतुर्दशी के दिन भगवान के वामन स्वरूप का पूजन करने का विशेष विधान है।

श्री हनुमान जी का जन्म उत्सव एवं सुंदरकांड पाठ
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार वैसे तो हनुमान जयंती चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है, लेकिन उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में अंजनि पुत्र बजरंग बली श्री हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात को हनुमान जयंती के रूप में मनाने की प्राचीन परंपरा है। इस पावन अवसर पर लोग रात के समय दीपक जलाकर हनुमान जी का पूजन करते हैं तथा श्री सुंदरकांड का पाठ करते हैं।

Roop Chaudas Upay सदाबहार जवान रहने और पापों से मुक्ति का अचूक उपाय
रूप चौदस के दिन विशेष दीपदान और मंत्र जाप करने से नरक के भय तथा समस्त पापों से मुक्ति मिलती है, साथ ही व्यक्ति बढ़ती उम्र के बावजूद खूबसूरत और सदाबहार जवान बना रहता है।

Roop Chaturdashi Puja vidhi रूप चौदस दीपदान एवं पूजा विधि
नरक चतुर्दशी के दिन सायंकाल (संध्या समय) मिट्टी का 4 बत्ती वाला दीपक तैयार करें। इस 4 बत्ती वाले दीपक का मुख पूर्व दिशा की ओर करके उसे घर के मुख्य द्वार पर रखें। दीपदान करते समय निम्नलिखित शास्त्रीय मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें:
'दत्तो दीप: चतुर्दश्यो नरक प्रीतये मया। चतुर्वर्ति समायुक्त: सर्व पापा न्विमुक्तये।'
दीपदान के पश्चात नए पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान का विधि-विधान से पूजन करें।
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