Edited By Sarita Thapa,Updated: 17 Jan, 2026 11:14 AM

संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी में आध्यात्मिक क्रांति की एक नई लहर देखी जा रही है। शुक्रवार को सनातनी किन्नर अखाड़े के शिविर में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ, जहां देश की पहली किन्नर अधिवक्ता को महामंडलेश्वर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी...
Magh Mela 2026 : संगम की रेती पर बसी तंबुओं की नगरी में आध्यात्मिक क्रांति की एक नई लहर देखी जा रही है। शुक्रवार को सनातनी किन्नर अखाड़े के शिविर में एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ, जहां देश की पहली किन्नर अधिवक्ता को महामंडलेश्वर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पट्टाभिषेक की सबसे बड़ी विशेषता देश की पहली किन्नर वकील का संत पद पर आसीन होना है। कानून की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए आध्यात्मिक पथ पर अग्रसर हुई हैं। उनके इस नए सफर को समाज के हर वर्ग को जोड़ने की एक अनोखी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
11 संतों का हुआ पट्टाभिषेक
किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि के सानिध्य में कुल 11 संतों को नए पदों की जिम्मेदारी दी गई। इनमें देश की पहली किन्नर वकील के साथ-साथ दो महिलाएं और एक पुरुष भी शामिल हैं। एक संत को महंत पद पर प्रतिष्ठित किया गया।
वैदिक नियमों और परंपराओं का पालन
यह पट्टाभिषेक कोई सामान्य कार्यक्रम नहीं था। इसमें उन्हीं प्राचीन परंपराओं और नियमों का पालन किया गया, जो 13 पारंपरिक अखाड़े सदियों से करते आए हैं। संतों ने पहले संगम तट पर स्वयं का पिंडदान किया, जो सांसारिक मोह त्यागने का प्रतीक है। पांच गुरुओं से दीक्षा ली गई, जिसमें चोटी काटना, भस्म धारण करना और लंगोटी देने जैसी रस्में शामिल थीं। अंत में आचार्य महामंडलेश्वर ने उन्हें गुरुमंत्र देकर सन्यास की मर्यादाओं में बांधा।
समावेशी सनातन संस्कृति
आचार्य कौशल्यानंद गिरि ने बताया कि आने वाले समय में अखाड़े में कश्मीरी पंडितों और दक्षिण भारतीय समुदाय के लोगों को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य सनातन धर्म को और अधिक समावेशी बनाना और समाज के हर उपेक्षित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ना है।
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