मानो या न मानो: कालाष्टमी की रात बढ़ जाती हैं तांत्रिक शक्तियां, जानें पूरा सच

Edited By Updated: 07 Apr, 2026 01:05 PM

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Kalashtami 2026 धार्मिक महत्व और रहस्य: हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली कालाष्टमी का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना जाता है। यह तिथि भगवान काल भैरव को समर्पित होती है, जो भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। साल 2026 में वैशाख...

Kalashtami 2026 धार्मिक महत्व और रहस्य: हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली कालाष्टमी का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व माना जाता है। यह तिथि भगवान काल भैरव को समर्पित होती है, जो भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। साल 2026 में वैशाख माह की कालाष्टमी 9 अप्रैल को मनाई जाएगी। 

इस दिन विशेष रूप से रात्रि का समय अत्यंत प्रभावशाली और रहस्यमयी माना जाता है, जिसे लेकर आम लोगों में कई तरह की मान्यताएं और जिज्ञासाएं प्रचलित हैं।

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कौन हैं काल भैरव?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, काल भैरव को काशी का कोतवाल और तंत्र-मंत्र के अधिपति देवता माना गया है। इनकी उत्पत्ति धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए हुई थी। काल (समय और मृत्यु) पर नियंत्रण रखने वाले देव के रूप में इनकी पूजा विशेष रूप से रात्रि में की जाती है।

क्यों खास होती है कालाष्टमी की रात?
मान्यता है कि कालाष्टमी की रात भगवान काल भैरव की उपासना के लिए सर्वोत्तम समय होता है। इस दौरान वातावरण शांत और ऊर्जा से परिपूर्ण माना जाता है, जिससे ध्यान, साधना और आध्यात्मिक अभ्यास अधिक प्रभावी हो जाते हैं। कई साधक इस रात विशेष पूजा और तंत्र साधना करते हैं, क्योंकि यह समय मानसिक एकाग्रता और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनुकूल माना जाता है।

क्या सच में बढ़ जाती हैं तांत्रिक शक्तियां?
तांत्रिक शक्तियों के बढ़ने की धारणा मुख्यतः आस्था और परंपराओं पर आधारित है। तंत्र शास्त्र में कालाष्टमी, अमावस्या और चतुर्दशी जैसी तिथियों को ऊर्जा परिवर्तन के विशेष समय के रूप में देखा जाता है।

हालांकि, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि इस रात वास्तव में “अलौकिक शक्तियां” बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय साधना और ध्यान के लिए अनुकूल जरूर हो सकता है, जिससे साधकों को अधिक प्रभाव का अनुभव होता है।

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रहस्यमयी क्यों मानी जाती है यह रात?
कालाष्टमी की रात को रहस्यमयी इसलिए कहा जाता है क्योंकि वातावरण अपेक्षाकृत शांत और ध्यान के लिए उपयुक्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव इस समय “जागृत” अवस्था में होते हैं। प्राचीन परंपराओं में साधु-संत इस रात को साधना के लिए विशेष मानते रहे हैं। इन कारणों से इस रात को आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

कालाष्टमी पर क्या करें?
इस दिन श्रद्धालु निम्न कार्य करते हैं:
काल भैरव की पूजा और आरती।
सरसों के तेल का दीपक जलाना।
“ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप।

जरूरतमंदों को दान
मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

कालाष्टमी की रात को लेकर प्रचलित तांत्रिक शक्तियों की बातें मुख्यतः धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी हैं। इसे एक आध्यात्मिक अवसर के रूप में देखना अधिक उचित है, जहां साधना और आत्मचिंतन के जरिए व्यक्ति मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकता है।

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