करवा चौथ की रात पति के हाथों से पानी पीने की परंपरा क्यों है खास? जानें नवविवाहित जोड़ों के लिए जरूरी बातें

Edited By Updated: 28 Oct, 2026 04:31 PM

karwa chauth water ritual significance

करवा चौथ का त्योहार केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, समर्पण और प्रेम का बहुत पावन उत्सव है। दिनभर का निर्जला व्रत रखने के बाद रात में चंद्र दर्शन और पूजन के बाद पति के हाथों से जल पूकर व्रत खोलने का विशेष विधान है।

Karwa Chauth Water Ritual Significance : करवा चौथ का त्योहार केवल एक उपवास नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट रिश्ते, समर्पण और प्रेम का बहुत पावन उत्सव है। दिनभर का निर्जला व्रत रखने के बाद रात में चंद्र दर्शन और पूजन के बाद पति के हाथों से जल पूकर व्रत खोलने का विशेष विधान है। खासतौर पर नवविवाहित जोड़ों के लिए यह पहला अनुभव बहुत यादगार और भावनात्मक होता है। तो आइए जानते हैं कि करवा चौथ की रात पति के हाथों से पानी पीने की परंपरा का क्या धार्मिक महत्व के बारे में-

Karwa Chauth Water Ritual Significance

पति के हाथों जल ग्रहण करने की परंपरा का महत्व

दिनभर के कठिन निर्जला व्रत के बाद जब पति अपनी पत्नी को छलनी से देखने के बाद अपने हाथों से जल पिलाते हैं, तो यह एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार को दर्शाता है। यह इस बात का संदेश है कि जीवन के हर दौर में वे एक-दूसरे का सहारा बनेंगे। शास्त्रों के अनुसार, यह परंपरा पति को यह अहसास कराती है कि उसकी लंबी आयु और मंगल के लिए उसकी जीवनसंगिनी ने यह कठिन तप किया है। जल पिलाकर व्रत तुड़वाना पति की ओर से पत्नी की सेहत, खुशी और रक्षा की जिम्मेदारी लेने का एक मौन संकल्प होता है। माना जाता है कि करवा चौथ की रात जब जोड़े एक-दूसरे का चेहरा देखते हैं और जल ग्रहण करते हैं, तो दांपत्य जीवन में चल रहे मनमुटाव दूर होते हैं और रिश्ते में एक नई मिठास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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नवविवाहित जोड़ों के लिए जरूरी सलाह और ध्यान रखने योग्य बातें

परंपरा और नियमों को समझें: अपने पहले व्रत के दौरान घर के बड़े-बुजुर्गों या सासू मां से सरगी, पूजा की कथा और शाम की अर्घ्य विधि को अच्छे से समझ लें, ताकि पूजा के समय कोई हड़बड़ी न हो।

स्वास्थ्य का रखें ख्याल: यदि पहली बार निर्जला व्रत रख रही हैं, तो सरगी के समय पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी और फल लें ताकि शरीर में दिनभर ऊर्जा बनी रहे। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या होने पर उपवास में जरूरी ढील लें।

एक-दूसरे के लिए समय निकालें: नवविवाहित पतियों को चाहिए कि वे इस दिन अपनी पत्नी का सहयोग करें। शाम के समय साथ मिलकर चंद्र दर्शन करें और इस क्षण को यादगार बनाने के लिए एक-दूसरे के प्रति आभार व्यक्त करें।

संयम और खुशी से मनाएं पर्व: पूजा और जल ग्रहण करते समय किसी भी प्रकार का तनाव या गुस्सा मन में न लाएं। शांत और प्रसन्नचित्त मन से किया गया पूजन ही पूर्ण फलदायी होता है।

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