Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Oct, 2026 12:05 PM

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा के पर्व को बेहद ही शुभ माना जाता है। 25 अक्टूबर दिन रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी लक्ष्मी धरती पर आती है और भ्रमण करती है।
Sharad Purnima Special : हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा के पर्व को बेहद ही शुभ माना जाता है। 25 अक्टूबर दिन रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी लक्ष्मी धरती पर आती है और भ्रमण करती है। इतना ही नहीं, कहा यह भी जाता है कि इस रात चंद्रदेव अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होते हैं और इस दिन रात की चांद की रोशनी को अमृत समान माना गया है। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात की चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा प्रचलित मानी गई है। लेकिन क्या आपने कभी इसके पीछे की वजह जानने का कोशिश की है या कभी यह सोचा है कि आखिर इस परंपरा की शुरूआत कैसे हुई और इसके फायदे क्या है। तो आइए जानते हैं कि इन सवालों के जवाबों के बारे में-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को खीर को खुले आसमान के नीचे रखने और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की किरणें खासतौर से बहुत शीतल और शुभ मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में राधा रानी और गोपियों के संग महारास किया था। कहते हैं कि उनके इस अलौकिक रास को देखकर चंद्रदेव ने पृथ्वी पर अमृत रूपी किरणों की वर्षा की थी। माना जाता है कि इन्हीं अमृत रुपी किरणों के लाभ को पाने के लिए लोग रात की चांदनी में खीर को खुला रखते हैं ताकि चांद की किरणें उसमें पड़े और उसके औषधीय गुणों को प्राप्त किया जा सकें।

इसके अलावा, शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। शरद पूर्णिमा की के साथ इस दिन कोजागर पूजा का पर्व भी मनाया जाता है और इसी वजह से इस पूर्णिमा का एक नाम कोजागरी पूर्णिमा भी है। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इसी वजह से कई लोग रात के समय लक्ष्मी पूजन करते हैं, दीपक जलाते हैं और खीर का भोग लगाकर परिवार के सदस्यों में प्रसाद भी वितरित करते हैं।

मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा के बाद धीरे-धीरे मौसम का मिजाज बदलने लगता है और ठंड का असर महसूस होने लगता है। ऐसे में खानपान में भी बदलाव करना जरूरी माना जाता है। इस पर्व पर दूध और चावल से बनी खीर तैयार करने की परंपरा को बदलते मौसम से जोड़कर भी देखा जाता है। मान्यता है कि सर्दियों के दिनों में पौष्टिक और ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
बताते चलें कि खीर को किस धातु में रखना सबसे बेहतर माना जाता है तो मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात खीर को चांदी के बर्तन में रखना सबसे अच्छा माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार चांदी को चंद्रमा से जुड़ा हुआ माना जाता है। कहा जाता है कि इस चांदी के बर्तन में खीर रखने से चंद्रमा से जुड़ी सारी ऊर्जाएं एक साथ केंद्रित होती है और इससे कुंडली में मौजूद चंद्रमा की स्थिति भी बेहतर होती है।

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