Lakshmi Panchami 2026 : खाली जेब भी भर जाएगी कुबेर के खजाने से बस लक्ष्मी पंचमी पर जरूर करें मां लक्ष्मी की आरती और मंत्रों का जाप

Edited By Updated: 22 Mar, 2026 10:55 AM

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हिंदू धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी या श्री पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी मां महालक्ष्मी को समर्पित है।

Lakshmi Panchami 2026 : हिंदू धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को लक्ष्मी पंचमी या श्री पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी मां महालक्ष्मी को समर्पित है। मान्यता है कि जो भक्त इस दिन पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं, उनके जीवन से दरिद्रता का समूल नाश हो जाता है और उनके घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है। वर्ष 2026 में लक्ष्मी पंचमी का यह पावन पर्व कई शुभ योगों के मिलन के साथ आ रहा है, जो इसे आर्थिक तंगी दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली बनाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि लक्ष्मी पंचमी के दिन केवल मौन रहकर पूजा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मां लक्ष्मी की प्रिय आरती और विशिष्ट मंत्रों का उच्चारण वह चाबी है, जो आपके भाग्य के बंद दरवाजों को खोल सकती है। तो आइए जानते हैं कि कैसे मात्र कुछ विशेष मंत्रों और श्रद्धापूर्ण आरती के माध्यम से आप अपनी खाली जेब को कुबेर के खजाने जैसी संपन्नता से भर सकते हैं और देवी लक्ष्मी को अपने आंगन में आमंत्रित कर सकते हैं।

लक्ष्मी जी के मंत्र

महामंत्र

ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।

श्री लक्ष्मी मंत्र

ॐ आं ह्रीं क्रौं श्री श्रिये नम: ममा लक्ष्मी

नाश्य-नाश्य मामृणोत्तीर्ण कुरु-कुरु

सम्पदं वर्धय-वर्धय स्वाहा:।

महामंत्र

पद्मानने पद्म पद्माक्ष्मी पद्म संभवे

तन्मे भजसि पद्माक्षि येन सौख्यं लभाम्यहम्।।

महामंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:

महामंत्र

ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये,

धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।

लक्ष्मी जी की आरती:

ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता |

तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

उमा ,रमा,ब्रम्हाणी, तुम जग की माता |

सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता |

जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धी धन पाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता |

कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

जिस घर तुम रहती हो , ताँहि में हैं सद् गुण आता |

सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता |

खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरनिधि जाता |

रत्न चतुर्दश तुम बिन ,कोई नहीं पाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

महालक्ष्मी जी की आरती ,जो कोई नर गाता |

उँर आंनद समाता,पाप उतर जाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

स्थिर चर जगत बचावै ,कर्म प्रेर ल्याता |

रामप्रताप मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥

ॐ जय लक्ष्मी माता….

ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता |

तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

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