Edited By Sarita Thapa,Updated: 24 Aug, 2026 05:47 PM

सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव ही नहींं, बल्कि माता पार्वती की पूजा के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है। सावन मास के हर मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गोरी व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए बहुत फलदायी माना जाता है।
Mangla Gauri Vrat duration and rules : सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव ही नहींं, बल्कि माता पार्वती की पूजा के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है। सावन मास के हर मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गोरी व्रत सुहागिन महिलाओं और अविवाहित कन्याओं के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। माता पार्वती को समर्पित मंगला गौरी व्रत अखंड सौभाग्य, संतान प्राप्ति और अच्छे वर की कामना के लिए रखा जाता है। लेकिन कई महिलाओं के मन में बार-बार एक सवाल आता है कि एक बार मंगला गौरी व्रत की शुरुआत करने के बाद कितने सालों तक इसको निभाना चाहिए और इसकी सही अवधि क्या है।
मंगला गौरी व्रत की सही अवधि
शास्त्रों के अनुसार, मंगला गौरी व्रत की लगातार 5 सालों तक रखने का विधान है। शादी के पहले साल के सावन से इसे शुरू किया जाता है और लगातार 5 साल तक सावन के सभी मंगलवार को यह व्रत रखा जाता है। 5 साल पूरे होने के बाद विधि-विधान के साथ इसका सामपन कर दिया जाता है।
व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य 4 प्रमुख नियम
मंगला गौरी पूजा में 16 की संख्या अत्यंत पवित्र मानी जाती है। पूजा के दौरान माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री, 16 लौंग, 16 इलायची, 16 फल, 16 जीरा और 16 अनाज अर्पित करने का विधान है।

एक समय फलाहार या अन्न
इस व्रत में दिनभर निर्जला या फलाहार रहकर शाम को पूजा के बाद केवल एक बार अन्न ग्रहण किया जाता है।
सकारात्मक विचार और ब्रह्मचर्य
व्रत के दिन मन में किसी के प्रति द्वेष या नकारात्मक विचार न लाएं और पूर्ण रूप से शुद्धता का पालन करें।
अविवाहित कन्याओं के लिए नियम
यदि कन्या मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रख रही है, तो वह विवाह तय होने या 5 वर्ष पूरे होने पर इसका पारण/उद्यापन कर सकती है।
मंगला गौरी व्रत का उद्यापन क्यों है जरूरी?
शास्त्रों के अनुसार, किसी भी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसका समय पूरा होने पर उद्यापन किया जाए।
5 वर्ष पूरे होने पर सावन के अंतिम मंगलवार को किसी योग्य पंडित के मार्गदर्शन में हवन और पूजन करवाएं।
माता गौरी को 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें।
पूजा के बाद 16 सुहागिन महिलाओं को भोजन कराकर उन्हें श्रृंगार सामग्री और वस्त्र दान में दें तथा आशीर्वाद लें।
