क्या आप कम हंसते हैं ? जानिए इससे शरीर और दिमाग को कितना नुकसान होता है

Edited By Updated: 11 Jan, 2026 02:08 PM

mental health awareness

The Health Benefits of Laughter :  तनाव, भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा से भरी आज की दुनिया में हंसी वह सरल औषधि है, जो बिना किसी खर्च के शरीर और मन- दोनों को स्वस्थ रखती है। हंसी न जाति देखती है, न भाषा, न उम्र। एक बच्चे की खिलखिलाहट से लेकर बुजुर्ग की...

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The Health Benefits of Laughter :  तनाव, भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा से भरी आज की दुनिया में हंसी वह सरल औषधि है, जो बिना किसी खर्च के शरीर और मन- दोनों को स्वस्थ रखती है। हंसी न जाति देखती है, न भाषा, न उम्र। एक बच्चे की खिलखिलाहट से लेकर बुजुर्ग की मंद मुस्कान तक, हर हंसी जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संकेत देती है।

केवल भाव नहीं, एक विज्ञान
हंसी को अक्सर हल्के में लिया जाता है, लेकिन इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक आधार है।

हंसी और दिमाग
जब हम हंसते हैं, तो दिमाग में एंडॉर्फिन नामक ‘हैप्पी हार्मोन’ रिलीज होता है। यह दर्द को कम करता है और मन को प्रसन्न रखता है।

तनाव से राहत
हंसी शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव हार्मोन को कम करती है। यही कारण है कि हंसने के बाद व्यक्ति हल्का और शांत महसूस करता है।

दिल के लिए फायदेमंद
अध्ययनों के अनुसार, रोजाना खुलकर हंसने से हृदय रोगों का खतरा कम हो सकता है। हंसी रक्त संचार को बेहतर बनाती है।

इम्यून सिस्टम मजबूत
हंसने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। हंसी शरीर में एंटीबॉडीज के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।

रोचक तथ्य
इंसान औसतन दिन में 15-20 बार हंसता है, जबकि बच्चे 300 से ज्यादा बार। हंसी संक्रामक होती है- किसी को हंसते देखना हमें भी हंसने पर मजबूर कर देता है। इंसान सबसे ज्यादा अपने दोस्तों के साथ हंसता है, न कि चुटकुले सुनकर। नकली हंसी भी शरीर को वही फायदे देती है, जो असली हंसी देती है, यही लाफ्टर योग का आधार है। हंसते समय चेहरे की 15 से ज्यादा मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं।

हंसी और भारतीय परंपरा
भारतीय संस्कृति में हंसी को हमेशा सकारात्मक दृष्टि से देखा गया है। संस्कृत साहित्य में कहा गया है- हास्यं जीवनस्य भूषणम्।

अर्थात हंसी जीवन का आभूषण है। प्राचीन नाट्यशास्त्र में नवरसों में हास्य रस को विशेष स्थान दिया गया है। लोककथाओं, विदूषकों, बीरबल की कहानियों और अकबर-बीरबल जैसे किस्सों में हास्य के माध्यम से जीवन की गंभीर सच्चाइयां सरल रूप में प्रस्तुत की गई हैं।

आधुनिक जीवन में हंसी क्यों कम हो रही है ?
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग हंसने से ज्यादा सोचने लगे हैं। काम का दबाव, सोशल मीडिया की तुलना, भविष्य की चिंता, अकेलापन- ये सभी कारण हंसी को जीवन से दूर कर रहे हैं। विडंबना यह है कि हम ‘हंसने के लिए समय नहीं’ कहकर खुद को बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं।

लाफ्टर योग : बिना वजह हंसने की कला
लाफ्टर योग में चुटकुलों या हास्य सामग्री की जरूरत नहीं होती। इसमें
सांस, शरीर की गतिविधियां और सामूहिक हंसी शामिल होती है।
शुरुआत में हंसी बनावटी लग सकती है, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह असली बन जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, नियमित लाफ्टर योग से  अवसाद,  अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, चिंता जैसी समस्याओं में लाभ मिलता है।

हंसी और रिश्ते
हंसी रिश्तों को मजबूत बनाती है। साथ हंसने से लोगों के बीच भरोसा बढ़ता है और संवाद आसान होता है। यही कारण है कि परिवारों, दोस्तों और कार्यस्थलों पर हास्यपूर्ण माहौल को सकारात्मक माना जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, जिन दंपतियों में साथ हंसने की आदत होती है, उनके रिश्ते अधिक लंबे और संतुलित होते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए हंसी का महत्व
बच्चों में हंसी रचनात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाती है। बुजुर्गों के लिए हंसी अकेलेपन और अवसाद से लड़ने का सशक्त माध्यम है। यही कारण है कि कई वृद्धाश्रमों और स्कूलों में अब हास्य गतिविधियां शामिल की जा रही हैं।
‘कम हंसने की नहीं, ज्यादा हंसने की आदत डालिए’ क्योंकि हंसी न केवल उम्र बढ़ाती है, बल्कि जीवन में रंग भी भर देती है। 

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