Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Feb, 2026 02:07 PM

एक बार राजा भोज गहरी निद्रा में सोए थे। उन्हें स्वप्न में एक तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए। राजन ने उनसे पूछा, ‘‘महात्मन! आप कौन हैं?’’
Inspirational Context : एक बार राजा भोज गहरी निद्रा में सोए थे। उन्हें स्वप्न में एक तेजस्वी वृद्ध पुरुष के दर्शन हुए। राजन ने उनसे पूछा, ‘‘महात्मन! आप कौन हैं?’’
वृद्ध ने कहा, ‘‘राजन मैं सत्य हूं। मैं तुम्हारे कर्मों की सच्चाई तुम्हें बताने के लिए प्रकट हुआ हूं। मेरे पीछे-पीछे आओ और अपने कार्यों की वास्तविकता को देखो।’’
राजा भोज वृद्ध के पीछे-पीछे चल दिए। राजा भोज बहुत दान-पुण्य, यज्ञ, व्रत आदि करते थे। उन्होंने अनेक तालाब, मंदिर, कुएं, बगीचे बनवाए थे। राजा के मन में इन कार्यों के कारण अभिमान आ गया था। वृद्ध पुरुष के रूप में आया सत्य राजा भोज को अपने साथ उनकी कृतियों के पास ले गया।

वहां जैसे ही सत्य ने पेड़ों को छुआ, सब एक-एक करके सूख गए, बगीचे बंजर भूमि में बदल गए। राजा इतना देखते ही परेशान हो गया। फिर सत्य राजा को मंदिर ले गया। सत्य ने जैसे ही मंदिर को छुआ, वह खंडहर में बदल गया। राजा से यह सब देखा न गया।
सत्य ने कहा, ‘‘राजन! यश की इच्छा के लिए जो कार्य किए जाते हैं उनसे केवल अहंकार की पुष्टि होती है, धर्म का पालन नहीं। नि:स्वार्थ होकर कर्त्तव्य भाव से जो कार्य किए जाते हैं उन्हीं का फल पुण्य के रूप में मिलता है और यही पुण्य फल का रहस्य है।’’
इतना कहकर सत्य अंतर्ध्यान हो गए। राजा ने नींद टूटने पर गहरा विचार किया और सच्ची भावना से कर्म करना प्रारंभ किया जिसके बल पर उन्हें न सिर्फ यश-कीर्ति की प्राप्ति हुई बल्कि उन्होंने बहुत पुण्य भी कमाया।

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