Motivational Concept: ईमानदारी का मोल नहीं

Edited By Updated: 06 May, 2022 02:09 PM

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एक राजा के अधिकारी राज्य का टैक्स वसूल कर उसमें से कुछ हिस्सा अपने पास रख लेते थे और राजा से कहते थे कि जनता टैक्स नहीं देती इसलिए राजा को एक सच्चे अधिकारी की तलाश थी। राजा के मंत्री ने सलाह दी

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एक राजा के अधिकारी राज्य का टैक्स वसूल कर उसमें से कुछ हिस्सा अपने पास रख लेते थे और राजा से कहते थे कि जनता टैक्स नहीं देती इसलिए राजा को एक सच्चे अधिकारी की तलाश थी। राजा के मंत्री ने सलाह दी कि आप राज्य में ढिंढोरा पिटवा दीजिए कि आपको राज्य का टैक्स वसूल करने के लिए किसी योग्य अधिकारी की आवश्यकता है। जब इस विषय में लोग आपसे मिलने आएं, तो उनसे आप नाचने के लिए कहिएगा।

मंत्री की सलाह मान कर राजा ने सारे राज्य में यह घोषणा करवा दी।  जब राज्य के कई आवेदक निश्चित समय पर राजमहल के सामने एकत्रित हो गए, तो राजा एक कमरे में जाकर बैठ गए। उस कमरे का रास्ता एक गलियारे से होकर जाता था जिसमें घना अंधेरा था। मंत्री ने एक-एक करके लोगों को उस गलियारे में से राजा के सामने भेजना शुरू किया।

राजा ने उनमें से हर एक को नाचने के लिए कहा, किन्तु एक व्यक्ति को छोड़कर शेष सभी झिझक गए और बिना नाचे ही बाहर चले गए। एक व्यक्ति राजा के सामने जमकर नाचा। तब मंत्री ने कहा-महाराज! मैंने अंधेरे गलियारे में सोने के सिक्के व जेवर बोरे में भरवा कर रखवा दिए थे।

जो बेईमान थे, उन्होंने अपनी जेबें मोहरों से भर ली थीं। यदि वे नाचते, तो उनकी जेबों से मोहरें गिरतीं और उनकी चोरी पकड़ी जाती। एक इसी व्यक्ति ने मोहरें व जेवर नहीं लिए थे, इसलिए यह निर्भयतापूर्वक नाचा। राजा को इस प्रकार राज्य में सच्चा अधिकारी मिल गया। 
 

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