Muni Shri Tarun Sagar: कड़वे प्रवचन... लेकिन सच्चे बोल

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 13 Jul, 2021 10:54 AM

muni shri tarun sagar

जब आप बरसात में भीगकर घर आते हैं तो भाई कहता है ‘‘छाता लेकर क्यों नहीं गए थे?’’

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जब आप बरसात में भीगकर घर आते हैं तो भाई कहता है ‘‘छाता लेकर क्यों नहीं गए थे?’’

बहन कहती है, ‘‘बरसात बंद होने तक रुक सकते थे क्या?’’

बाप कहता है, ‘‘जब सर्दी-जुकाम होगा तब पता चलेगा कि बरसात में भीगना क्या होता है।’’

पर मां भीतर से तौलिया लाकर सिर पोंछती है।

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जिंदगी की फिल्म भी तीन घंटे की होती है। बचपन, जवानी और बुढ़ापा। घड़ी में तीन कांटे होते हैं। बचपन सैकेंड का कांटा है, जो भागता हुआ दिखता है। जवानी मिनट का कांटा है, जो चलता हुआ दिखता है और बुढ़ापा घंटे का कांटा है जो न भागता हुआ दिखता है, न चलता हुआ। फिर भी भाग भी रहा है और चल भी रहा है। जिंदगी की फिल्म का अंत आए इससे पहले प्रभु के चरणों में झुक जाना।

सूई का काम करने वाली जुबान में शहद है और कैंची का काम करने वाली जुबान में जहर है। सूई जोडऩे का काम करती है और कैंची काटने का। दो को एक करने का काम सूई का है और एक को दो करने का काम कैंची का है। जुबान को ‘चूना’ नहीं, ‘चीनी’ बनाइए। मतलब मीठा भले न खाएं, पर स्वभाव को मीठा जरूर बनाएं।

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जीवन के वाक्य में अर्द्धविराम होते हैं, फुल स्टाप नहीं। जिंदगी में एकाध बार असफल हो गए तो इसका मतलब यह कतई नहीं कि आपकी सफलता के सारे द्वार बंद हो गए। फिर से ट्राई करें, सफलता जरूर मिलेगी। तुमने सुना होगा, ‘‘लहरों से डरकर नैया पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। कोशिश तो करो। कोशिश ही नहीं करोगे तो प्रोग्रैैस कहां से होगी!’’

एक आदमी समोसे का मसाला खा रहा था और बाहर का हिस्सा फैंक रहा था। मैंने पूछा, ‘‘भाई! तुम आलू क्यों खा रहे हो?’’

वह बोला, ‘‘मुनि जी! आपने ही तो कल बाहर की चीज खाने को मना किया था।’’

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आदमी बड़ा होशियार हो गया है। वह हर जोड़ का तोड़ निकाल लेता है। पर मैं कहता हूं कि धर्म के मार्ग में से मनमाफिक गलियां मत निकालिए। यह स्वयं के साथ किया जाने वाला छल है।

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