Edited By Parveen Kumar,Updated: 16 Mar, 2026 07:58 PM

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेज उछाल देखने को मिला। वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा और अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो करीब चार साल का उच्चतम स्तर माना...
नेशनल डेस्क : मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में तेज उछाल देखने को मिला। वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा और अनिश्चितता के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो करीब चार साल का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। पिछले एक महीने के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।
निर्यातकों के सामने नई चुनौतियां
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर भारतीय निर्यात पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास भारत के लगभग 25 मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। समुद्री मार्गों में बाधा और सुरक्षा चिंताओं के कारण कई निर्यातकों को लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ला सकती है राहत पैकेज
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार प्रभावित निर्यातकों के लिए राहत उपायों पर विचार कर रही है। बताया जा रहा है कि वाणिज्य मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें संकट से जूझ रहे निर्यातकों को राहत देने के लिए पैकेज का सुझाव दिया गया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो सेवाओं पर पड़ रहे प्रभाव के कारण मध्य पूर्व को होने वाले निर्यात पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार जल्द ही सहायता से जुड़े कदमों की घोषणा कर सकती है।
भारत की तेल आपूर्ति सुरक्षित
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात के बावजूद भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति फिलहाल सुरक्षित है। देश में रोजाना करीब 55 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है और सरकार ने विभिन्न स्रोतों से सप्लाई सुनिश्चित की हुई है।
कई देशों से आयात कर रहा है भारत
भारत वर्तमान में लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। इसके अलावा देश ने तेल आयात के मार्गों में भी विविधता बढ़ाई है। अब करीब 70 प्रतिशत कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा अन्य समुद्री रास्तों से लाया जा रहा है, जबकि पहले यह हिस्सा लगभग 55 प्रतिशत था। इससे संभावित संकट के समय आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिल रही है।