Shri Sanwaliya Ji Temple Udaipur : सांवलिया सेठ के दरबार में धनवर्षा ! चार चरणों की गिनती में सामने आया 29 करोड़ का आंकड़ा, भक्तों ने दिल दिया दान

Edited By Updated: 10 Mar, 2026 08:34 AM

shri sanwaliya ji temple udaipur

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में एक बार फिर आस्था का सैलाब नोटों की शक्ल में देखने को मिला है।

Shri Sanwaliya Ji Temple Udaipur : राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया सेठ मंदिर में एक बार फिर आस्था का सैलाब नोटों की शक्ल में देखने को मिला है। हाल ही में होली के अवसर पर करीब डेढ़ महीने बाद जब भगवान का भंडार खोला गया, तो दान की राशि देखकर हर कोई दंग रह गया। मेवाड़ के इस विख्यात मंदिर में भक्तों की अटूट श्रद्धा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल चार दिनों की गिनती में ही दान का आंकड़ा 29 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। सांवलिया सेठ, जिन्हें लोग अपना बिजनेस पार्टनर मानते हैं, उनके खजाने से नोटों का पहाड़ निकला है।

चार चरणों में हुई नोटों की गिनती
2 मार्च 2026 को राजभोग आरती के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर का भंडार खोला गया था। मंदिर प्रशासन और बैंक कर्मियों की देखरेख में हुई गिनती अब तक चार चरणों में पूरी हो चुकी है। 

पहला चरण (2 मार्च): 10.65 करोड़ रुपये।

दूसरा चरण (5 मार्च): 7.25 करोड़ रुपये।

तीसरा चरण (6 मार्च): 2.61 करोड़ रुपये।

चौथा चरण (7 मार्च): 8.55 करोड़ रुपये।

कुल नकद: अब तक लगभग 29 करोड़ 8 लाख 10 हजार रुपये गिने जा चुके हैं।

सोना, चांदी और विदेशी मुद्रा
कैश के अलावा, भगवान के भंडार से भारी मात्रा में आभूषण और विदेशी मुद्राएं भी निकली हैं। दान पात्र से करीब 1 किलो सोना, 142 किलो से अधिक चांदी और लगभग 15 देशों की करेंसी प्राप्त हुई है। इसमें डॉलर, रियाल और दीनार जैसे विदेशी नोट शामिल हैं, जो दर्शाते हैं कि सांवलिया सेठ की ख्याति सात समंदर पार तक फैली हुई है।

पार्टनर को हिस्सा देने आते हैं भक्त
सांवलिया सेठ के बारे में यह मान्यता है कि कई व्यापारी उन्हें अपने व्यापार में हिस्सा (Partner) देते हैं। जब भी उन्हें मुनाफा होता है, वे ईमानदारी से भगवान का हिस्सा उनके चरणों में अर्पित कर देते हैं। यही कारण है कि यहां का दान पात्र कभी खाली नहीं रहता।

अभी और बढ़ेगा आंकड़ा
गिनती का कार्य अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। छोटे नोटों, सिक्कों, मनी ऑर्डर और ऑनलाइन माध्यम से आए दान की अंतिम गणना होना अभी बाकी है। माना जा रहा है कि पूरी गिनती होने तक यह आंकड़ा एक नया रिकॉर्ड बना सकता है।

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