Edited By Sarita Thapa,Updated: 24 Jan, 2026 04:42 PM

भारतीय संस्कृति में नदियों को मात्र जलधारा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी मां का दर्जा दिया गया है। इनमें मां नर्मदा का स्थान अत्यंत गौरवशाली और रहस्यमयी है।
Narmada Jayanti 2026 : भारतीय संस्कृति में नदियों को मात्र जलधारा नहीं, बल्कि जीवनदायिनी मां का दर्जा दिया गया है। इनमें मां नर्मदा का स्थान अत्यंत गौरवशाली और रहस्यमयी है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को पूरा देश, विशेषकर मध्य प्रदेश और गुजरात, नर्मदा जयंती के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन दिन भगवान शिव के आनंदमयी पसीने से मां नर्मदा का प्राकट्य हुआ था, इसीलिए इन्हें 'रेवा' और 'शंकर-सुता' भी कहा जाता है। जहां अन्य नदियों में स्नान से पुण्य मिलता है, वहीं मां नर्मदा के बारे में कहा गया है कि उनके केवल श्रद्धापूर्वक दर्शन मात्र से ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पापों का शमन हो जाता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। तो आइए जानते हैं नर्मदा जयंती 2026 के शुभ मुहूर्त और पूजन महत्व के बारे में-
Narmada Jayanti Shubh Muhurat नर्मदा जयंती शुभ मुहूर्त
पंचांग की गणना के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का प्रारंभ 25 जनवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 39 मिनट से हो रहा है और इस तिथि का समापन उसी दिन यानी 25 जनवरी की रात को 11 बजकर 10 मिनट पर होगा। चूंकि हिंदू धर्म में पर्वों का निर्धारण उदयातिथि के आधार पर किया जाता है, इसलिए नर्मदा जयंती का पावन पर्व 25 जनवरी 2026 को ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

Significance of Narmada Jayanti नर्मदा जयंती धार्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार, प्रलय काल में जब समस्त संसार जलमग्न हो जाता है, तब भी मां नर्मदा का अस्तित्व सुरक्षित रहता है।नर्मदा जी को महादेव का अंश माना जाता है। यही कारण है कि नर्मदा के तल से निकलने वाला हर पत्थर 'नर्मदेश्वर शिवलिंग' के रूप में प्रतिष्ठित होता है और बिना प्राण-प्रतिष्ठा के पूजा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि गंगा में स्नान करने से जो पुण्य मिलता है, वह पुण्य मां नर्मदा के केवल दर्शन करने से ही प्राप्त हो जाता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ