Navratri Rules 2026  : नवरात्रि के 9 दिनों में इन कामों पर होती है सख्त मनाही, जानें जरूरी नियम

Edited By Updated: 12 Mar, 2026 03:23 PM

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Navratri Rules 2026  : चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है। यह नौ दिन शक्ति की उपासना, आत्म-संयम और शुद्धिकरण के माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, ताकि मां...

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Navratri Rules 2026  : चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो रहा है। यह नौ दिन शक्ति की उपासना, आत्म-संयम और शुद्धिकरण के माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, ताकि मां दुर्गा की कृपा आप पर बनी रहे और घर में सुख-समृद्धि का वास हो।

Navratri Rules 2026  

 बाल और नाखून काटना
नवरात्रि के दौरान बाल कटवाना, दाढ़ी बनाना और नाखून काटना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, मुंडन या बाल काटने से शरीर की ऊर्जा का क्षय होता है, जबकि नवरात्रि संचय और साधना का समय है। यदि आप व्रत रख रहे हैं या अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो इन नियमों का पालन करना और भी आवश्यक हो जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।

चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग
नवरात्रि के नौ दिनों तक चमड़े से बनी वस्तुओं जैसे बेल्ट, जूते-चप्पल, या पर्स का उपयोग करने से बचना चाहिए। चमड़ा मृत पशु की खाल से बनता है, जिसे अशुद्ध माना जाता है। शक्ति की पूजा में शुद्धता का बहुत महत्व है, इसलिए पूजा के समय या मंदिर जाते समय चमड़े की वस्तुओं का त्याग करें।

 तामसिक भोजन का सेवन (प्याज और लहसुन)
नवरात्रि के दौरान न केवल व्रत रखने वालों को, बल्कि घर के अन्य सदस्यों को भी सात्विक भोजन करना चाहिए। इन नौ दिनों में मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन वर्जित है। प्याज और लहसुन को तामसिक माना जाता है जो मन में उत्तेजना और आलस्य पैदा करते हैं, जिससे आध्यात्मिक मार्ग में बाधा आती है।

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अखंड ज्योति को अकेला छोड़ना
यदि आपने घर में मां दुर्गा के सामने अखंड ज्योति प्रज्वलित की है, तो घर को कभी भी खाली या बंद करके न छोड़ें। अखंड ज्योति की देखभाल के लिए घर में किसी न किसी का होना अनिवार्य है। ज्योति का बुझना अशुभ संकेत माना जाता है, इसलिए उसमें समय-समय पर घी या तेल डालते रहें और उसे हवा के झोंकों से बचाएं।

कलह और अपमान करना
नवरात्रि का पर्व शांति और प्रेम का प्रतीक है। इन दिनों में घर में वाद-विवाद, झगड़ा या किसी को अपशब्द कहने से बचना चाहिए। विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और कन्याओं का अपमान भूलकर भी न करें, क्योंकि मां दुर्गा स्वयं नारी शक्ति का स्वरूप हैं। जिस घर में क्लेश होता है, वहां लक्ष्मी और दुर्गा का वास नहीं होता।

दिन में सोना
शास्त्रों के अनुसार, व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिन में सोने से बचना चाहिए। यह समय आलस्य त्यागकर मां की भक्ति और मंत्र जाप में बिताने का होता है। दिन में सोने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और शरीर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।

काले रंग के कपड़ों का त्याग
नवरात्रि के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। काला रंग नकारात्मकता और शोक का प्रतीक माना जाता है। इसके बजाय लाल, पीले, सफेद या हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है। लाल रंग मां दुर्गा को अत्यंत प्रिय है और यह शक्ति व ऊर्जा का प्रतीक है।

नींबू काटना
नवरात्रि के दौरान, विशेषकर जो लोग व्रत रखते हैं, उनके लिए नींबू काटना वर्जित माना गया है। तंत्र शास्त्र और कुछ मान्यताओं के अनुसार, नींबू काटना 'बलि' का प्रतीक माना जाता है। इसलिए सात्विक पूजा के दौरान घर में नींबू काटने से बचना चाहिए।
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