Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Sep, 2026 10:00 AM

आजकल लोगों में अपने शरीर पर भगवान के नाम, मंत्र और धार्मिक प्रतीकों का टैटू बनबाने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग इस चलन को अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करने का एक आधुनिक तरीका मानते हैं।
Premanand Maharaj on Tattoos : आजकल लोगों में अपने शरीर पर भगवान के नाम, मंत्र और धार्मिक प्रतीकों का टैटू बनबाने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग इस चलन को अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करने का एक आधुनिक तरीका मानते हैं। हालांकि, वृंदावन के सुप्रसद्धि संत पूज्य प्रेमानंद महाराज ने धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रओं के मुताबिक लोगों को यह समझाने का प्रयास किया है कि टैटू बनबाने से पहले हर व्यक्ति को धर्म के कुछ खास नियमों का खास रखना चाहिए। तो आइए जानते हैं कि भगवान के टैटू बनबाने को लेकर प्रेमानंद जी ने क्या कहा है।
पवित्रता और अशुद्धता का विचार
प्रेमानंद जी के अनुसार, मानव शरीर हमेशा एक जैसा पवित्र नहीं रहता है। रोजमर्रा की जिंदगी में व्यक्ति बहुत सारी अशुद्ध अवस्थाओं से गुजरता है- जैसे शौचालय जाना, झूठे हाथों से शरीर को छूना या अनजाने में अशुद्ध स्थानों पर बैठना। यदि शरीर पर भगवान का नाम या कोई मंत्र अंकित है, तो उस स्थान पर अनजाने में अशुद्धता लगने से बड़ा धार्मिक दोष लगता है।

चमड़े पर ईश्वर का नाम
शास्त्रों के अनुसार, भगवान का नाम अत्यंत पवित्र और पूजनीय है। इसे कागज, कपड़े या मन में जपना सही माना जाता है। लेकिन चमड़ी पर सुई से छेदकर रंहग भरना भगवान के नाम का अनादर के समान माना जाता है। शरीर तो नश्वर है और एक दिन नष्ट हो जाएगा, इसलिए उस पर नाम उकेरने के बजाय नाम को अपने विचारों और हृदय में बसाना चाहिए।
अंगों के चयन की गलती
कई लोग भगवान के टैटू तो शरीर में बनवा लेते हैं, लेकिन हाथ, कलाई, पीठ या पैर के पास टैटू बनाने से सोते समय, बैठते समय या काम करते समय वह टैटू कपड़े से ढकता है, पैरों से छू सकता है या उस पर गंदगी लग सकती है। प्रेमानंद जी के अनुसार, यह अनजाने में क गई बहुत बड़ी भूल है, जिससे पुण्य मिलने के बजाय पाप के भागी बनना पड़ता है।

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