इस जगह हुआ था ‘श्रीराम-हनुमान जी’ का मिलन

Edited By Updated: 04 Aug, 2021 03:49 PM

ramayan sri ram and hanuman ji meet place

धार्मिक शास्त्रों में किए वर्णन के अनुसार श्री राम और हनुमान जी की भेंट का दृश्य अति मनमोहक माना गया है। आज भी जब किसी कार्यक्रम के माध्यम से इस दृश्य को दर्शाया जाता है, तो श्री राम और हनुमान

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धार्मिक शास्त्रों में किए वर्णन के अनुसार श्री राम और हनुमान जी की भेंट का दृश्य अति मनमोहक माना गया है। आज भी जब किसी कार्यक्रम के माध्यम से इस दृश्य को दर्शाया जाता है, तो श्री राम और हनुमान जी के भक्तों के ह्रदय पुलकति हो उठते हैं। तो ऐसे मे सोचिए अगर आपको उसे जगह के दर्शन करने का अवसर प्राप्त हो जाए जहां श्रीराम और पवनपुत्र की भेंट हुई। जी हां, बहुत कम लोग जानते होंगे कि हमारे देश में वो स्थल आज भी मौजूद है, जहां मान्यताओं के अनुसार श्री राम अपने परम भक्त श्री राम से मिले थे। 

आज हम आपको श्री राम की वनवास यात्रा से जुड़े जिन स्थलों के दर्शन इस बार आपको करवाने जा रहे हैं, उनमें वह स्थान विशेष रूप से शामिल है जहां श्रीराम तथा हनुमान जी की मुलाकात हुई थी। अन्य स्थलों में वे स्थान जहां बाली और सुग्रीव का युद्ध हुआ तथा किष्किंधा शामिल हैं।

हनुमान मंदिर, हनुमान हल्ली, कोप्पल
कन्नड़ में हल्ली का अर्थ है गांव। यहां हनुमान जी तथा श्रीराम का मिलन हुआ था। पास ही एक पर्वत पर हनुमान जी की माता अंजना देवी का एक सुंदर मंदिर भी स्थित है।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 4/3, 4 पूरे अध्याय, मानस 4/0/1/4/0/3 से 4/3/3)

सुग्रीव और श्रीराम-लक्ष्मण जी का मिलन ह पी में ऋष्यमूक पर्वत पर हुआ था। सुग्रीव तब बाली के भय से यहीं रहते थे। यहां पहाड़ी में एक कंदरा को सुग्रीव गुफा कहा जाता है। कोप्पल के अनागुन्डी में चिंतामणि नामक स्थान पर तुंगभद्रा नदी धनुषाकार घुमाव लेती है। नदी के एक ओर बाली-सुग्रीव का युद्ध हुआ था तथा दूसरे किनारे पर वृक्षों की ओट से श्रीराम ने बाली को बाण मारा था। यहां श्रीराम के चरण चिह्न हैं। 
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 3/54/1 से 4 तक 4/2, 5, 6, 7, 8, 10, 11 पूरे अध्याय 4/12/1 से 13, मानस 4/0/1 4/6/12)

यह अनागुन्डी गांव ही वास्तव में प्राचीन किष्किंधा है। यहां वाल्मीकि रामायण में वर्णित दृश्य देखने को मिलते हैं। अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में यहां बाली का भंडार, अंजना पर्वत, वीरूपाक्ष मंदिर, कोदण्डराम मंदिर, मतंग पहाड़ी दर्शनीय हैं। महत्वपूर्ण यह भी है कि यहां का राजवंश स्वयं को अंगद का वंशज मानता है।
(ग्रंथ उल्लेख : वा.रा. 4/15/1 से 4/16/13 4/26/18 से 42, 4/29 पूरा अध्याय, 4/31/16 से 4/38/14, मानस 4/10/5 से 4/11/5 4/19/1 से 5) —डा. राम अवतार
 

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