Charanamrit Rules: क्या आप सही तरीके से ग्रहण करते हैं चरणामृत? श्री पुंडरीक जी महाराज से जानें इसकी सही विधि

Edited By Updated: 07 Apr, 2026 11:50 AM

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Charanamrit Rules चरणामृत का धार्मिक महत्व: सनातन धर्म के अनुसार चरणामृत को अमृत के समान पवित्र माना गया है। मंदिरों में या किसी भी पूजा-पाठ के अंत में भक्तों को चरणामृत दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका सेवन करने से नकारात्मक ऊर्जा...

Charanamrit Rules चरणामृत का धार्मिक महत्व: सनातन धर्म के अनुसार चरणामृत को अमृत के समान पवित्र माना गया है। मंदिरों में या किसी भी पूजा-पाठ के अंत में भक्तों को चरणामृत दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका सेवन करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। आत्मा शुद्ध होती है और
पापों का नाश होता है।

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गलत तरीके से पीने से नहीं मिलता पूरा फल
अक्सर लोग चरणामृत को सामान्य जल की तरह पी लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसे ग्रहण करने की एक विशेष विधि होती है। हाल ही में श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने चरणामृत लेने का सही तरीका बताया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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चरणामृत ग्रहण करने की सही विधि
महाराज जी के अनुसार चरणामृत लेने का सही तरीका इस प्रकार है- सबसे पहले हथेली को गोमुखी मुद्रा में बनाएं। उसी में चरणामृत ग्रहण करें। हथेली के नीचे वाले भाग (तीर्थ स्थान) से इसे पिएं। पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से सेवन करें। साथ ही भगवान का स्मरण करना अत्यंत आवश्यक है।

मंत्र जाप का विशेष महत्व
चरणामृत ग्रहण करते समय निम्न मंत्रों का जाप करना शुभ माना गया है:
केशवाय नमः
माधवाय नमः
नारायणाय नमः

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विशेष मंत्र:
“अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम्। विष्णोः पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते॥”

इन मंत्रों के जाप से आध्यात्मिक ऊर्जा और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

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चरणामृत और पंचामृत में अंतर
अक्सर लोग चरणामृत और पंचामृत को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में अंतर होता है:

चरणामृत: भगवान के चरणों का पवित्र जल

पंचामृत: पांच पवित्र तत्वों (दूध, दही, घी, शहद और चीनी) से बना मिश्रण

चरणामृत का सेवन पापों के नाश के लिए किया जाता है, जबकि पंचामृत का उपयोग भगवान के अभिषेक और प्रसाद के रूप में होता है। चरणामृत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है। इसे सही विधि और मंत्रों के साथ ग्रहण करने से ही इसका पूर्ण पुण्य फल प्राप्त होता है। अगली बार जब भी आप चरणामृत लें, तो इन नियमों का पालन जरूर करें और अपनी भक्ति को और भी मजबूत बनाएं।

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