Edited By Lata,Updated: 12 Mar, 2020 03:13 PM

होली के पवित्र त्योहार के बाद रंग पंचमी का पर्व बड़ी ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। ये पर्व भी होली की तरह
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होली के पवित्र त्योहार के बाद रंग पंचमी का पर्व बड़ी ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। ये पर्व भी होली की तरह रंगों के साथ मनाया जाता है। रंग पंचमी का पर्व बहुत ही खास होता है। बता दें कि ये होली के ठीक 5 दिन बाद आता है और इस बार ये दिन कल यानि 13 मार्च को मनाया जाएगा। रंगों का यह पर्व फिजाओं में भी प्यार की मिठास घोल देता है। कहते हैं कि गुलाल से वातावरण में ऐसी स्थिति व्याप्त होती है जिससे कि तमोगुण और रजोगुण का नाश होता है। वहीं वास्तु के हिसाब से भी इस दिन खेले जाने वाले रंगों का अपना एक अलग महत्व बताया है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

शक्ति का प्रतीक लाल रंग
लाल रंग ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक है, इसलिए शक्ति पूजा में अनार, गुड़हल के पुष्प, लाल वस्त्र इत्यादि लाल रंग की वस्तुओं का उपयोग किया जाता है। आप लाल रंग का इस्तेमाल उस जगह पर कर सकते हैं जहां गर्माहट और ऊर्जा की ज़रूरत हो। वास्तु के अनुसार जो लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं और जिन्हें गुस्सा आता हैं, उन्हें लाल रंग नहीं चुनना चाहिए क्योंकि ये उनके लिए तनावपूर्ण हो सकता है।
विष्णु का प्रिय पीला रंग
पीला रंग अहिंसा, प्रेम, आनंद और ज्ञान का प्रतीक है। यह रंग व्यक्ति के स्नायु तंत्र को संतुलित व मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।पीला रंग भगवान श्रीकृष्ण को पसंद है। श्री विष्णु और उनके अवतारों को पीताम्बर धारण करवाने का यह प्रमुख कारण है। यह रंग सौंदर्य और आध्यात्मिक तेज को तो निखरता ही है, साथ ही पीले वस्त्र धारण करने से देव गुरु वृहस्पति भी प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।

आनंद का प्रतीक नारंगी रंग
नारंगी रंग ज्ञान, ऊर्जा, शक्ति, प्रेम और आनंद का प्रतीक है। यह रंग लाल और पीले से मिलकर प्रकट होता है। जीवन में इसके प्रयोग से मंगल और वृहस्पति दोनों ग्रहों की कृपा तो बनी ही रहती है, साथ ही सूर्यदेव की भी असीम कृपा बरसती है। इस रंग का इस्तेमाल वे लोग कर सकते हैं जो ज़िंदगी से निराश हैं और जो डिप्रेशन का शिकार हैं।
पारदर्शी है नीला रंग
नीला रंग श्री विष्णु, श्री राम, श्री कृष्ण, श्री महादेव के शरीर का है। नीला रंग विष को पीकर गले में रोक लेने की क्षमता रखने वाले भगवान शिव के गुण और भाव को प्रदर्शित करता है। यह रंग साफ़-सुथरा निष्पापी, पारदर्शी, करुणामय, उच्च विचार होने का सूचक है। नीले रंग से होली खेलकर आप शनिदेव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं। वास्तु में यह रंग आसमान और पानी का प्रतिनिधित्व करता है।
समृद्धि का सूचक हरा रंग
ये रंग समृद्धि,उत्कर्ष, प्रेम, दया, प्रगति, प्रकृति, सुकून, हीलिंग, प्रचुरता, तरक़्क़ी एवं सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। हरे रंग के प्रयोग से बुध की कृपा बनी रहती है। इसके हीलिंग प्रॉपर्टी के कारण ही ज़्यादातर अस्पतालों में इस रंग का इस्तेमाल किया जाता है। हरे रंग की और भी खासियत है, ये गुस्से को शांत करता है और मूड को हल्का बनाता है।

मन संतुलित करता बैंगनी रंग
पर्पल या बैंगनी रंग विलासिता, रईसी, आत्मसम्मान और संतुलन का प्रतीक है एवं यह रंग पवित्रता और मासूमियत को दर्शाता है। ये रंग उन लोगों खासतौर से उन पुरुषों के द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है जो हीनभावना से ग्रसित हों।