Edited By Prachi Sharma,Updated: 18 Jan, 2026 03:15 PM

Sadhguru Quotes : अक्सर हम अपने जीवन की समस्याओं से उतना दुखी नहीं होते, जितना उनके बारे में ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोच-सोच कर होते हैं। आधुनिक जीवनशैली में तनाव और चिंता का सबसे बड़ा कारण हमारा अनियंत्रित मन है। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और...
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Sadhguru Quotes : अक्सर हम अपने जीवन की समस्याओं से उतना दुखी नहीं होते, जितना उनके बारे में ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोच-सोच कर होते हैं। आधुनिक जीवनशैली में तनाव और चिंता का सबसे बड़ा कारण हमारा अनियंत्रित मन है। ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के विचार इस उलझे हुए मन को शांत करने के लिए एक टॉर्च की तरह काम करते हैं। यदि आप भी विचारों के जाल में फंसे हैं, तो सद्गुरु के ये अनमोल सूत्र आपके मानसिक कष्टों को समाप्त कर आपको स्पष्टता प्रदान करेंगे।
मन की प्रकृति को समझना
सद्गुरु कहते हैं कि मन एक उपकरण है लेकिन हमने उसे अपना मालिक बना लिया है। आपका मन एक शानदार सेवक हो सकता है लेकिन एक बहुत ही बुरा मालिक है। जब हम बहुत अधिक सोचते हैं, तो हम वास्तव में अपनी यादों और कल्पनाओं के बीच झूल रहे होते हैं। सद्गुरु का मानना है कि अधिकांश लोग उन चीजों से दुखी हैं जो कभी हुई ही नहीं या जो बीत चुकी हैं। इसका अर्थ है कि आप उस चीज से पीड़ित हैं जो अस्तित्व में ही नहीं है।
विचारों से दूरी बनाना सीखें
ओवरथिंकिंग से बचने का सबसे प्रभावी तरीका विचारों को रोकना नहीं है, बल्कि उनसे दूरी बनाना है। आप अपने विचार नहीं हैं, आप वह जागरूकता हैं जो इन विचारों को देख रही है। सद्गुरु एक उदाहरण देते हैं जैसे सड़क पर चलते हुए आप ट्रैफिक को देखते हैं लेकिन आप खुद ट्रैफिक नहीं बन जाते। वैसे ही, मन में आ रहे विचारों को बस आने-जाने दें, उनमें उलझें नहीं। जैसे ही आप यह महसूस करते हैं कि विचार केवल मानसिक बुलबुले हैं, आपका दिमाग तुरंत शांत होने लगता है।
वर्तमान क्षण की शक्ति
सद्गुरु के अनुसार, कष्ट केवल वर्तमान से कट जाने के कारण होते हैं। यदि आप अभी इसी क्षण में पूरी तरह से मौजूद हैं, तो कोई दुख नहीं हो सकता। दुख या तो कल में है या आने वाले कल में। जब हम ज्यादा सोचते हैं, तो हम यहां और अभी को खो देते हैं। कष्टों से निपटने का रास्ता तब मिलता है जब आप शांत होकर स्थिति को देखते हैं, न कि जब आप उसके बारे में चिंता करते हैं।

बुद्धि बनाम स्मृति
सद्गुरु स्पष्ट करते हैं कि ओवरथिंकिंग तब होती है जब आपकी बुद्धि आपकी स्मृति के जाल में फंस जाती है। आप पुरानी असफलताओं के आधार पर भविष्य का फैसला करने लगते हैं। हर दिन को एक नई शुरुआत मानें। अपनी बुद्धि को यादों के बोझ से मुक्त रखें।