Edited By Sarita Thapa,Updated: 19 Feb, 2026 01:25 PM

भारतीय इतिहास के आकाश में छत्रपति शिवाजी महाराज एक ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी चमक सदियों बाद भी फीकी नहीं पड़ी है। वे केवल एक कुशल योद्धा या महान सेनापति ही नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी राष्ट्र निर्माता और प्रबंधन के गुरु भी थे।
Chhatrapati Shivaji Maharaj Quotes : भारतीय इतिहास के आकाश में छत्रपति शिवाजी महाराज एक ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र हैं, जिनकी चमक सदियों बाद भी फीकी नहीं पड़ी है। वे केवल एक कुशल योद्धा या महान सेनापति ही नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी राष्ट्र निर्माता और प्रबंधन के गुरु भी थे। उनके द्वारा स्थापित हिंदवी स्वराज्य का आधार केवल बल नहीं, बल्कि उच्च नैतिक विचार और न्यायप्रियता थी। आज के प्रतिस्पर्धी युग में, शिवाजी महाराज के विचार युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। तो आइए जानते हैं उनके वो प्रेरणादायक सूत्र, जो हार न मानने का साहस और जीत का जुनून पैदा करते हैं।
साहस और आत्मविश्वास पर विचार
शिवाजी महाराज का मानना था कि डर इंसान का सबसे बड़ा शत्रु है।
उन्होंने सिखाया- "जब हौसले बुलंद हों, तो गगनचुंबी पहाड़ भी मिट्टी के ढेर जैसा लगने लगता है। आत्मविश्वास ही वह शक्ति है जो असंभव को संभव बना देती है।"
युवाओं के लिए सीख: अपनी क्षमताओं पर कभी संदेह न करें। कठिन से कठिन लक्ष्य भी आपके अडिग विश्वास के सामने घुटने टेक देता है।

रणनीति और बुद्धिमत्ता
केवल तलवार के बल पर साम्राज्य नहीं जीते जाते, इसके लिए सही समय और सही सोच की आवश्यकता होती है। महाराज ने कहा था कि "शत्रु को केवल बल से नहीं, बल्कि बुद्धि से भी पराजित करना चाहिए। वीरता का अर्थ केवल लड़ना नहीं, बल्कि बुद्धिमानी से अपनी जीत सुनिश्चित करना है।"
युवाओं के लिए सीख: मेहनत जरूरी है, लेकिन सही दिशा और Smart work के बिना सफलता अधूरी है।
मातृभूमि और नैतिकता
शिवाजी महाराज के लिए राष्ट्र सर्वोपरि था। उन्होंने नारी शक्ति का सम्मान और धर्म की रक्षा को शासन का मूल मंत्र बनाया। उनका विचार था -"स्वतंत्रता एक ऐसा वरदान है जिसे पाने का हक हर किसी को है। लेकिन इस स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए अनुशासन और चरित्र की बलि नहीं दी जा सकती।"
लक्ष्य के प्रति समर्पण
महाराज ने युवाओं को सदैव कर्मशील रहने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, "यदि लक्ष्य बड़ा हो, तो रुकने का कोई स्थान नहीं होता। जब तक आप अपने गंतव्य तक न पहुँच जाएँ, तब तक विश्राम आपके संकल्प को कमजोर कर सकता है।"

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