Edited By Sarita Thapa,Updated: 10 Jun, 2026 09:50 AM

हिंदू धर्म में सावन के महीने को शिव जी की कृपा प्राप्त करने और उनकी पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। यह दिन पूरी तरह से शिव जी की पूजा के लिए समर्पित होता है।
Sawan 2026 start date : हिंदू धर्म में सावन के महीने को शिव जी की कृपा प्राप्त करने और उनकी पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना जाता है। यह दिन पूरी तरह से शिव जी की पूजा के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस माह में पूरे विधि-विधान से और सच्चे मन से जो भी देवों के देव महादेव की पूजा करता है और उपवास रखता है तो उसके मन की हर मुराद पूरी होती है, शादीशुदा जीवन में मधुरता बनी रहती है और अविवाहित लोगों को मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। इस बार सावन का माह बहुत खास संयोग लेकर आ रहा है। इस माह में यदि आप भी जलाभिषेक कर शिव जी को प्रसन्न करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो पंचांग के अनुसार कुछ विशेष तिथियों को नोट करना आपके लिए बेहद जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि सावन के माह में शिव जी का जलाभिषेक करने के लिए कौन सी 7 तिथियां खास रहने वाली है।
सावन 2026 कब से कब तक रहेगा?
पंचांग के अनुसार, सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी और यह 28 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। कुल मिलाकर शिव भक्तों को देवों के देव महादेव की पूजा करने और उनकी कृपा पाने के लिए सावन माह के 30 दिन मिलने वाले हैं। इस दौरान शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव से महादेव की आराधना करते हैं, जलाभिषेक करते हैं और कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं।

जलाभिषेक के लिए ये 7 दिन हैं सबसे महत्वपूर्ण
सावन का दूसरा सोमवार (10 अगस्त 2026)
सावन का दूसरा सोमवार शिव जी के जलाभिषेक के लिए बहुत शुभ दिन रहने वाला है क्योंकि इस दिन सावन का प्रदोष व्रत रखा जाएगा। माना जाता है कि इस दिन किया गया शिव पूजन मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
सावन शिवरात्रि (11 अगस्त 2026)
सावन सोमवार के ठीक अगले दिन यानी 11 अगस्त को सावन की मुख्य शिवरात्रि मनाई जाएगी। महाशिवरात्रि के बाद इस शिवरात्रि का महत्व सबसे अधिक है। इस दिन रात्रि के चार प्रहर में किया जाने वाला जलाभिषेक हर तरह के कष्टों से मुक्ति दिलाता है।

हरियाली अमावस्या (12 अगस्त 2026)
सावन महीने की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या कहा जाता है। इस दिन महादेव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप की पूजा की जाती है। प्रकृति से जुड़ने और पितृ दोष की शांति के लिए भी इस दिन जलाभिषेक करना फलदायी माना गया है।
नाग पंचमी और तीसरा सोमवार (17 अगस्त 2026)
इस बार सावन का तीसरा सोमवार बेहद अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है। 17 अगस्त को तीसरे सोमवार के साथ-साथ नाग पंचमी का पर्व भी है। इस दिन महादेव के साथ उनके गले के आभूषण 'नागराज' की पूजा होगी। जिन लोगों की कुंडली में राहु-केतु जनित दोष या कालसर्प दोष हैं, उनके लिए इस दिन जलाभिषेक करना रामबाण साबित हो सकता है।

सावन का चौथा सोमवार (24 अगस्त 2026)
यह इस साल के सावन का आखिरी सोमवार होगा। जो लोग पूरे महीने का व्रत रखते हैं या सोलह सोमवार की शुरुआत करते हैं, उनके लिए इस दिन का विशेष महत्व होता है। मनोकामना पूर्ति के लिए इस दिन विशेष रुद्राभिषेक किया जाता है।
सावन पूर्णिमा या रक्षाबंधन (28 अगस्त 2026)
28 अगस्त को सावन का अंतिम दिन है। इस दिन श्रावणी पूर्णिमा होती है। इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। सावन के आखिरी दिन भोलेनाथ का पूर्ण श्रृंगार कर जलाभिषेक करने से पूरे महीने की पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।

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