Sheetala Ashtami: जानें किस शुभ मुहूर्त में होगा शीतला माता का पूजन, क्या है इसका महत्व

Edited By Updated: 01 Apr, 2021 03:27 PM

sheetala ashtami 2021

प्रत्येक वर्ष होली से पूरे आठ दिन बाद शीतला अष्टमी का पर्व पड़ता है, जिसे मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस बार शीतला अष्टमी

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प्रत्येक वर्ष होली से पूरे आठ दिन बाद शीतला अष्टमी का पर्व पड़ता है, जिसे मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। इस बार शीतला अष्टमी का यह पर्व 4 अप्रैल को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता के इस पर्व को दौरान ताज़ा खाना बनाना या खाना वर्जित होता हैै। माता शीतला को भी जो भोग लगाया जाता है कि वो भी एक दिन पहले बनाकर रख लिया जाता है, जिसे बसोड़ा कहा जाता है। पौराणकि किंवदंतियों की मानें तो शीतला माता चेचक, खसरा आदि रोगों की देवी कहलाती हैं। इनकी पूजा करने से व्यक्ति को कभी जीवन में यह रोग नहीं सताते।

शीतला अष्टमी के दिन माता को बासी पकवान चढ़ाए जाते हैं। जो एक दिन पहले यानि शीतला सप्मी को ही बना लिया जाता है। मुख्य रूप से लोग इन्हें दही, रबड़ी, चावल, हलवा, पूरी, गुलगुले आदि का भोग लगाते हैं और स्वयं भी अगले दिन यही सब ग्रहण करते हैं। आईए आगे जानते हैं अष्टमी तिथि का शुभ मुहूर्त तथा इस तिथि से जुड़ा महत्व- 
 
चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि-4 अप्रैल 2021, रविवार

अष्टमी तिथि आरंभ- 4 अप्रैल 2021 को सुबह 04 बजकर 12 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त- 05 अप्रैल 2021 को प्रातः 02 बजकर 59 मिनट तक
पूजा मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 08 मिनट से लेकर शाम को 06 बजकर 41 मिनट तक
पूजा की कुल अवधि- 12 घंटे 33 मिनट

क्या है इस दिन का महत्व- 
ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि शीतला अष्टमी के दिन से ही ग्रीष्मकाल की शुरूआत होती हैं। यानि इस दिन से मौसम सें तेजी से बदलाव होता है ठंडी हवाएं गर्म हो जाती हैं। शीतला माता के स्वरूप को शीतलता प्रदान करने वाला माना जाता है। इसलिए शीतला अष्टमी के व्रत का अर्थ यह माना जाता है कि इस दिन के बाद बासी भोजन त्याज्य होता है। इसके साथ ही गर्मियों में साफ-सफाई का विशेष महत्व दिया जाना चाहिए ताकि ग्रीष्म रोग जैसे चेचक, खसरा आदि से बचा जा सके। 

कैसे हैै मां शीतला माता का रूप-
धार्मिक ग्रंथों में इनका दो स्वरूप वर्णित है, उसके अनुसार हाथों में कलश, सूप, मार्जन (झाड़ू) और नीम के पत्ते धारण किए होती हैं। गर्दभ की सवारी किए हुए यह अभय मुद्रा में विराजमान हैं।

चढ़ता है शीतला माता को चावल का प्रसाद
शीतला अष्टमी के दिन माता की पूजा के समय उन्हें खास मीठे चावलों का भोग चढ़ाया जाता है। जो गुड़ या गन्ने के रस से बनाए जाते हैं। इन्हें भी सप्तमी की रात को ही बनाया जाता है। 

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