Somvati Amavasya 2026 : सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा क्यों है खास? जानें धार्मिक महत्व

Edited By Updated: 05 Nov, 2026 10:52 AM

somvati amavasya 2026 significance

सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत खास महत्व होता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों का तर्पण करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है।

Somvati Amavasya 2026 Significance : सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत खास महत्व होता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों का तर्पण करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा और उसकी 108 बार परिक्रमा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। कहा जाता है कि ऐसा करने स जीवन की परेशानियों से राहत मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पीपल के पेड़ को हिंदू धर्म में बहुत पूजनीय स्थान प्राप्त है। माना जाता है कि इसमें भगवान विष्णु सहित कई देवी-देवताओं का वास होता है। यही वजह है कि विशेष तिथियों पर पीपल की पूजा करने और उसके नीचे दीपक जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। तो आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा करने का महत्व और पूजा का सही तरीका।

Somvati Amavasya 2026 Significance

सोमवती अमावस्या पर पीपल की 108 परिक्रमा क्यों की जाती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमावती अमावस्या पर पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलने की कामना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पीपल की पूजा करने से पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है। इसके अलावा, पीपल की परिक्रमा को वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और परिवार की खुशहाली से भी जोड़कर देखा जाता है। 

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पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा का धार्मिक महत्व

पितरों की कृपा पाने के लिए
सोमवती अमावस्या पितरों को समर्पित मानी जाती है। इस दिन पीपल की पूजा और परिक्रमा करने से पितरों की प्रसन्नता और आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।

सुख-समृद्धि के लिए
धार्मिक विश्वास है कि पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है। ऐसे में इसकी पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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वैवाहिक जीवन में खुशहाली
सोमवती अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। पीपल की परिक्रमा भी इसी दिन किए जाने वाले शुभ कार्यों में शामिल है।

नकारात्मकता से मुक्ति की कामना
मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और परिक्रमा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मकता बढ़ती है।

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