Edited By Sarita Thapa,Updated: 31 Oct, 2026 10:10 AM

सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को समर्पित भानु सप्तमी व्रत भी बहुत शुभ माना जाता...
Bhanu Saptami 2026 : सनातन धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को समर्पित भानु सप्तमी व्रत भी बहुत शुभ माना जाता है। यह व्रत तब रखा जाता है, जब रविवार के दिन सप्तमी तिथि का संयोग बनता है। माना जाता है कि इस दिन पूरे विधि-विधान और श्रद्धापूर्वक सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य देने आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में आने वाली सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। नवंबर 2026 में भी भानु सप्तमी का विशेष संयोग बनने जा रहा है। तो आइए जानते हैं इसकी सही तारीख, पूजा का शुभ समय, विधि और धार्मिक महत्व।
भानु सप्तमी शुभ मुहूर्त
सप्तमी तिथि का आरंभ 31 अक्टूबर 2026, शाम 4 बजकर 57 मिनट से होगा और सप्तमी तिथि की समाप्त 1 नवंबर 2026, दोपहर लगभग 2 बजकर 51 मिनट पर होगी। उदया तिथि के अनुसार भानु सप्तमी 1 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 06 मिनट से सुबह 08 बजकर 20 बजे तक रहेगा।

भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व
भानु सप्तमी का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में सूर्य देव को ऊर्जा, प्रकाश, आरोग्य और जीवन का आधार बताया गया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है और सप्तमी तिथि भी उनकी पूजा के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब ये दोनों एक साथ आते हैं, तो इस संयोग को भानु सप्तमी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने और विधि-विधान से पूजा करने पर व्यक्ति को सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और यश का आशीर्वाद मिलता है। इसके अलावा जीवन में आत्मविश्वास बढ़ाने और नकारात्मकता दूर करने के लिए भी सूर्य आराधना को लाभकारी माना गया है।
भानु सप्तमी की पूजा विधि
भानु सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
उसके बाद सूर्य देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
फिर तांबे के लोटे में साफ जल भरें और इसमें लाल फूल, अक्षत और थोड़ा रोली या लाल चंदन मिला कर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
सूर्य देव को अर्घ्य देते समय उनके नामों और मंत्रों का जाप करें और उन्हें लाल फूल, गुड़ और गेहूं अर्पित करें।
पूजा के अंत में सूर्य देव की आरती करें और परिवार की सुख-शांति एवं अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।

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