Edited By Sarita Thapa,Updated: 21 Jan, 2026 04:26 PM

एक बार कुछ बालक स्वामी विवेकानंद से शिक्षा पर बातें कर रहे थे। स्वामी विवेकानंद उनसे बोले, "क्या तुममें से कोई बता सकता है कि शिक्षा क्या होती है?" एक विद्यार्थी बोला, "विद्या ग्रहण करना ही शिक्षा कहलाती है।"
Swami Vivekananda Story : एक बार कुछ बालक स्वामी विवेकानंद से शिक्षा पर बातें कर रहे थे। स्वामी विवेकानंद उनसे बोले, "क्या तुममें से कोई बता सकता है कि शिक्षा क्या होती है?" एक विद्यार्थी बोला, "विद्या ग्रहण करना ही शिक्षा कहलाती है।"
फिर उन्होंने पूछा कि शिक्षा का उद्देश्य क्या है?
इस पर विद्यार्थियों की राय अलग-अलग थी। सभी की राय जानने के बाद स्वामी जी बोले, "बालको, शिक्षा वह है जिससे मनुष्य की बौद्धिक क्षमता का विकास हो। यह शब्दों को रटना मात्र नहीं है। यह व्यक्ति की मानसिक शक्तियों का ऐसा विकास है, जिससे वह आजादी से कुछ तय कर सके।"

तभी एक विद्यार्थी बोला, "स्वामीजी, शिक्षा से हम नई-नई बातें भी तो सीखते हैं।" यह सुनकर स्वामी जी बोले, "तुम्हारी बात ठीक है बालक लेकिन नई जानकारी का अर्थ यह नहीं कि उसमें अधकचरी और ऐसी बातें हों, जिन्हें तुम पचा ही न पाओ। शिक्षा जीवन निर्माण करती है, चरित्र सुगठित करती है, और बुरी आदतों पर नियंत्रण करना भी सिखाती है। शिक्षा तभी सार्थक होती है जब विपरीत परिस्थिति में भी शिक्षा का सही उपयोग करके विजय प्राप्त की जाए। व्यक्ति शिक्षा का सदुपयोग कर न केवल अपना और अपने परिवार का, बल्कि पूरे देश का भला करता है।"
स्वामी जी की बातें सुनकर वहां उपस्थित विद्यार्थी एक स्वर में बोले, "स्वामी जी, आज से हम भी शिक्षा ग्रहण कर हर अशिक्षित व्यक्ति को शिक्षित करने का प्रयास करेंगे। जो गलत और रूढ़िवादी बातें लोगों में भ्रम बनकर फैली हैं, उन्हें दूर करेंगे।"
विद्यार्थियों की बातें सुनकर विवेकानंद बोले, "अगर तुम सब आज से ही ऐसा करना प्रारंभ कर दोगे तो वह दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया के सामने नया उदाहरण पेश करेगा।"

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