Edited By Niyati Bhandari,Updated: 17 Apr, 2026 12:05 PM

Vastu for Space Under Stairs: सीढ़ी के नीचे पूजाघर बनाना वास्तु दोष नहीं माना जाता है, क्योंकि आधुनिक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंगों में भी लोग एक-दूसरे के ऊपर रहते हैं और स्लैब उस स्थान को अलग कर देता है। यदि टॉयलेट उत्तर, ईशान या पूर्व दिशा में है, तो...
Vastu for Space Under Stairs: वर्तमान समय में जो घर बन रहे हैं उनकी बनावट पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। पहले के समय में घर के मध्य में आंगन होता था और आसपास कमरे होते थे, उस समय शौचालय भी घर के बाहर बनाए जाते थे या शौच के लिए बाहर खुले स्थान का उपयोग किया जाता था। घरों में सैप्टिक टैंक भी नहीं होते थे। वर्तमान में प्लॉट के मध्य में घर बनाया जाता है और आस पास पार्किंग, गार्डन, हवा, रोशनी इत्यादि के लिए ओपन जगह छोड़ी जाती है और सैप्टिक टैंक भी बनाया जाता है।

जब वास्तु के प्राचीन ग्रंथ लिखे गये थे। उस समय सीढ़ियां पूरी तरह ठोस बनाई जाती थीं, इस कारण सीढ़ियों के नीचे किसी प्रकार की खाली जगह नहीं होती थी। सीढ़ियों के ठोस होने के कारण यह बहुत भारी बनती थीं, इसलिए ही प्राचीन ग्रंथों में इन्हें केवल दक्षिण पश्चिम में बनाने की सलाह दी गई है। जबकि आजकल सीढ़ियां अपनी सुविधा अनुसार कहीं भी बनाई जा सकती है और बनाई जा रही हैं।
आजकल बढ़ती आबादी और महंगाई के कारण प्लॉट के साइज छोटे हो गये हैं और घर की डिजाइन काफी बदल गई है, जिसमें बेडरूम के साथ अटैच्ड टॉयलेट-बाथरूम भी बनाये जाते हैं। इस कारण घर में 3-4 टॉयलेट-बाथरूम बन जाते हैं और सीढ़ियां भी स्लैब डालकर बनाई जाती हैं, इस कारण सीढ़ी के नीचे खाली जगह मिल जाती है। इस खाली जगह का उपयोग पूजा स्थान, स्टोर, वॉश एरिया या टॉयलेट इत्यादि बनाने के लिए किया जाने लगा है। मेरे अनुभव के आधार पर सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थान, स्टोर, वॉश एरिया या टॉयलेट इत्यादि बनाया जा सकता है।

हमारे देश में यह भी आम धारणा है कि सीढ़ी के नीचे पूजा का स्थान नहीं बनाना चाहिए क्योंकि सीढ़ी के ऊपर चढ़ते समय पूजा का स्थान नीचे होना उचित नहीं माना जाता। आजकल ज्यादातर लोग मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में रहते हैं, जहां ऊपर वाले फ्लोर पर क्या है, यह पता नहीं होता है, यदि नीचे के फ्लोर पर पूजा का स्थान होगा तो उसके ऊपर के फ्लोर वाले उस स्थान के ऊपर से आते जाते ही होंगे। नीचे और ऊपर दोनों फ्लोर के बीच में एक स्लैब ही होता है जैसा कि सीढ़ियांं पर भी होता है, जिस पर से आते जाते हैं। स्लैब से सीढ़ी के नीचे का भाग ऊपर के फ्लोर की तरह अलग हो जाता है, इसीलिए सीढ़ी के नीचे पूजा घर भी बनाने से कोई वास्तुदोष नहीं आता है।

यह बात जरूर है कि सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनाते समय वास्तु के कुछ नियमों को ध्यान में रखना चाहिए, जो कि इस प्रकार हैं-
यदि सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट उत्तर दिशा, ईशान कोण या पूर्व दिशा में बनाया जा रहा है, तो ऐसे में यहां का फ्लोर लेवल घर के बाकी हिस्से के बराबर या थोड़ा नीचे रखा जा सकता है। यदि टॉयलेट आग्नेय कोण, दक्षिण दिशा, नैऋत्य कोण, पश्चिम दिशा और वायव्य कोण में बनाया जा रहा है, तो इसका फ्लोर लेवल घर के बाकी फ्लोर लेवल के बराबर ही रखना चाहिए, नीचा बिल्कुल नहीं रखना चाहिए तथा यहां वाला माउंटेड वेस्टर्न कमोड लगाये तो ज्यादा बेहतर होता है।
सीढ़ियों के नीचे जगह थोड़ी संकरी होती है, इसलिए टॉयलेट बनाते समय उचित वेंटिलेशन (हवा और रोशनी) का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, ताकि घर में नमी और दुर्गंध की समस्या न हो।
मेरे अनुभव के आधार पर सीढ़ियों के नीचे टॉयलेट बनाना आधुनिक समय में एक सामान्य और उपयोगी विकल्प है। फिर भी आप इस विषय पर अन्य विद्वानों को पढ़कर अपने विवेक से निर्णय लें।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com
