Edited By Sarita Thapa,Updated: 14 Jun, 2026 11:50 AM

शादी केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो किस्मतों का मिलन मानी जाती है। यही वजह है कि हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में विवाह से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज़ को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। शादी की तारीख से लेकर मंडप, कपड़े, गहने और यहां तक कि...
Wedding Card Vastu Tips : शादी केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो किस्मतों का मिलन मानी जाती है। यही वजह है कि हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में विवाह से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज़ को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। शादी की तारीख से लेकर मंडप, कपड़े, गहने और यहां तक कि शादी के कार्ड तक को शुभ-अशुभ ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार शादी के कार्ड में की गई एक छोटी सी गलती भी दांपत्य जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। वास्तु और कुछ पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शादी के कार्ड पर छपी कुछ तस्वीरें, शब्द या चिन्ह अनजाने में नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं। कहा जाता है कि ऐसे कार्ड रिश्तों में तनाव, गलतफहमियां या वैवाहिक जीवन में बाधाओं का कारण भी बन सकते हैं। यही वजह है कि पुराने समय में विवाह पत्रिका बनवाते समय शुभ प्रतीकों और शब्दों का विशेष ध्यान रखा जाता था। तो आइए जानते हैं कि शादी के कार्ड में किन चीज़ों का ध्यान रखना चाहिए।
आजकल के कार्ड को लोग मॉर्डन टच या यूनिक लुक देने के लिए बहुत से नए आइडियाज सोचते हैं। उन्हीं में से देखा जाता है कि आजकल कई लोग शादी के कार्ड पर दूल्हा-दूल्हन की तस्वीरें भी छपवाते हैं। हो सकता है कि यह शादी के कार्ड को नया लुक देता हो और देखने में भी अच्छा लग रहा हो लेकिन वास्तु के अनुसार शादी के कार्ड में दूल्हा-दूल्हन की फोटो लगाना अच्छा नहीं माना जाता। माना जाता है कि इससे शादी के जोड़े को नज़र लग सकती है जिससे उनकी शादी पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इतना ही नहीं यह भी संभव है कि कोई उन तस्वीरों का गलत तरीके से इस्तेमाल कर सकता है।
आगे बता दें कि लोग शादी की थीम के अनुसार भी कार्ड डिजाइन करवाते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार शादी का कार्ड किस रंग का है, इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि शादी का कार्ड हमेशा लाल, पीला या केसरिया रंग का होना चाहिए। इन तीन रंगों को शादी का कार्ड बनवाने के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ये तीनों रंग जीवन में सौभाग्य लाते हैं।

बात करें कार्ड पर बने चिन्हों की, तो कार्ड पर सही और पवित्र चिन्हों का होना बेहद ज़रूरी माना जाता है। कहा जाता है कि शादी के कार्ड पर भगवान गणेश, ओम, कलश या फिर स्वस्तिक का चिन्ह ज़रूर होना चाहिए। कार्ड की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश की फोटो या फिर उनके मंत्र से करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। ऐसे में कार्ड पर सबसे पहले इनका चित्र या फिर मंत्र होना शुभ माना जाता है, ताकि विवाह बिना किसी विघ्न के संपन्न हो सके। ध्यान रखने वाली बात यह है कि कार्ड पर बने देवी-देवतओं के चित्र आधुनिक या फिर अमूर्त नहीं होने चाहिए क्योंकि आजकल AI के चलते चित्रों को बनाया जाता है, जो कई बार धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माने जाते।
शास्त्रों के अनुसार, शादी का सबसे पहला कार्ड भगवान गणेश जी के चरणों में अर्पित करना चाहिए। वहीं दूसरा कार्ड अपने कुल के देवी या देवता को अर्पित करना चाहिए। इसके बाद ही बाकी लोगों को कार्ड बांटें। ऐसा करना शुभ माना जाता है और देवी देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है।

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