दीपिका पादुकोण के 8 घंटे काम करने के फैसले की तारीफ में उतरे कन्नड़ डायरेक्टर इंद्रजीत लंकेश

Edited By Updated: 30 Jun, 2026 05:17 PM

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दीपिका पादुकोण हमेशा उन मुद्दों पर खुलकर बात करती हैं जो मायने रखते हैं। हाल ही में, फिल्मों में काम करने के समय को '8 घंटे' तक सीमित रखने को लेकर जो बात उन्होंने कही, उसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में वर्क-लाइफ बैलेंस (काम और निजी जिंदगी में संतुलन) पर...

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दीपिका पादुकोण हमेशा उन मुद्दों पर खुलकर बात करती हैं जो मायने रखते हैं। हाल ही में, फिल्मों में काम करने के समय को '8 घंटे' तक सीमित रखने को लेकर जो बात उन्होंने कही, उसने पूरी फिल्म इंडस्ट्री में वर्क-लाइफ बैलेंस (काम और निजी जिंदगी में संतुलन) पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस बीच, दीपिका को इंडस्ट्री से भी बड़ा सपोर्ट मिल रहा है। अब कन्नड़ फिल्म मेकर और जर्नलिस्ट इंद्रजीत लंकेश भी उनके समर्थन में आगे आए हैं। बता दें कि इंद्रजीत लंकेश ने ही दीपिका पादुकोण को उनकी पहली कन्नड़ फिल्म से लॉन्च किया था।

​इस मुद्दे पर बात करते हुए लंकेश ने कहा कि कलाकारों को, खासकर उन महिलाओं को जो मां बन चुकी हैं, एक बैलेंस शेड्यूल मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि फिल्मों की प्लानिंग उनके हिसाब से होनी चाहिए, न कि उनसे इतनी थका देने वाली शिफ्ट करानी चाहिए।

​दीपिका का सपोर्ट करते हुए उन्होंने समझाया, "अगर आप किसी आर्टिस्ट के साथ, खासकर दीपिका के साथ 6 घंटे शूट करते हैं, तो उसके बाद डायरेक्टर तो कैमरे के पीछे रहकर अगले 4 घंटे दूसरा सीन शूट कर सकता है। लेकिन आर्टिस्ट ऐसा नहीं कर सकता। उनके चेहरे पर थकान दिखने लगती है। इसलिए आप सीन्स की प्लानिंग और शेड्यूलिंग इस तरह कर सकते हैं कि उन्हें ब्रेक मिले। और ब्रेक देना बहुत जरूरी है। खासकर तब, जब आप एक मां हों और आपका छोटा बच्चा हो। आप बच्चे के लिए कोई केयरटेकर रख सकते हैं, लेकिन मां का प्यार और उनकी देखभाल सबसे जरूरी होती है।"

​लंकेश ने आगे दीपिका की तारीफ करते हुए कहा कि उनके इस कदम से न सिर्फ वर्किंग मदर्स को बल्कि इंडस्ट्री के हर एक्टर को फायदा होगा।

​उन्होंने कहा , "दीपिका ने जो 8 घंटे के काम की बात उठाई है, वह मुझे बहुत अच्छी लगी। उन्होंने हर महिला और हर आर्टिस्ट के लिए स्टैंड लिया है। कैमरे के सामने आपको ही आना होता है। अगर आप 8 घंटे से ज्यादा काम करेंगे, तो स्क्रीन पर थके हुए और बीमार दिखेंगे। कल को लोग आपको ही देखेंगे, क्योंकि पर्दे पर आप एक्टिंग कर रहे हैं। डायरेक्टर तो कैमरे के पीछे रहकर अपनी कहानी कह रहा है। लेकिन कैमरे के सामने आप होते हैं, और थके हुए चेहरे को कोई नहीं बचा सकता।"

​एक्टर्स के लुक पर होने वाली चर्चाओं पर बात करते हुए लंकेश ने कहा, "बाद में लोगों को ही जवाब देना पड़ता है कि आप बूढ़े दिख रहे हैं, थके हुए दिख रहे हैं या आपने अपना बेस्ट नहीं दिया। इसलिए एक एक्टर के लिए 8 घंटे की शिफ्ट बिल्कुल परफेक्ट है।"

​उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि एक्टिंग करना किसी कॉर्पोरेट ऑफिस की नौकरी से कहीं ज्यादा थका देने वाला काम है और शायद 8 घंटे भी बहुत ज्यादा हैं।

उन्होंने बताया , "सच कहूं तो यह शिफ्ट 6 घंटे की होनी चाहिए। किसी कॉर्पोरेट ऑफिस में 8 घंटे बैठना अलग बात है, वहाँ आप चाय-कॉफी पी सकते हैं, कंप्यूटर के सामने बैठकर खुद को फ्रेश रख सकते हैं। लेकिन एक्टिंग में ऐसा नहीं होता; कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता। आप जो भी महसूस कर रहे हैं, वो कैमरे में दिख जाता है। इसलिए 6 से 7 घंटे का काम काफी है, खासकर तब जब आप एक मां हों।"

​अब जब इंडस्ट्री के कई बड़े लोग इस बहस में शामिल हो रहे हैं, तो दीपिका पादुकोण की यह बात फिल्मों में बेहतर और हेल्दी माहौल बनाने की एक बड़ी मुहिम बन गई है। इंद्रजीत लंकेश का मानना है कि काम के घंटे तय होना एक्टर्स की स्क्रीन पर परफॉर्मेंस के साथ-साथ उनकी पर्सनल लाइफ की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए भी बेहद जरूरी है।

 

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