Review: मर्डर मिस्ट्री, ड्रामा और कॉमेडी का तड़का, दर्शकों को बांधे रखती है ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं'

Edited By Updated: 19 Jun, 2026 10:58 AM

read here hum angrezo ke zamane ke jailor hain review in hindi

यहां पढ़ें कैसी है फिल्म हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं...

फिल्म-  हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं (Hum Angrezo ke Zamane ke Jailor hain)
स्टारकास्ट- असरानी (Asrani), भंवर सिंह पुंडीर (Bhanwar Singh Pundir), मिलिंद गुनाजी (Milind Gunaji), जरीना वहाब (Zarina Wahab) , रक्षा गुप्ता (Raksha Gupta), मुस्कान वर्मा (Muskan Verma), विष्णु शर्मा (Vishnu Sharma), अभिनव चौहान (Abhinav Chauhan), मुश्ताक खान (Mushtaq Khan)
डायरेक्टर- राकेश सावंत(Rakesh Sawant)
रेटिंग- 3*

 

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय सिनेमा में कुछ फिल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि भावनात्मक वजहों से भी याद रखी जाती हैं। इस हफ्ते रिलीज हुई ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ भी ऐसी ही फिल्म है, जो एक ओर मर्डर मिस्ट्री का रोमांच देती है तो दूसरी ओर दिग्गज अभिनेता असरानी की आखिरी फिल्म होने के कारण दर्शकों के लिए भावुक अनुभव बन जाती है। युवा निर्देशक राकेश सावंत ने इस फिल्म में सस्पेंस, ड्रामा और हल्की कॉमेडी को एक साथ पिरोने की कोशिश की है। फिल्म में जरीना वहाब, मुश्ताक खान और अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आते हैं।

PunjabKesari

कहानी
फिल्म की कहानी एक मर्डर मिस्ट्री के इर्द-गिर्द घूमती है जिसमें धीरे-धीरे रिश्तों की परतें खुलती जाती हैं। ठाकुर विश्वजीत सिंह (मिलिंद गुनाजी) और उनकी पत्नी सावतेई (जरीना वहाब) के परिवार के भीतर छिपी उलझनें कहानी को आगे बढ़ाती हैं। कहानी तब नया मोड़ लेती है जब ठाकुर विश्वजीत सिंह के होने वाले दामाद की हत्या हो जाती है। इस हत्या का शक सीधे ठाकुर विश्वजीत सिंह पर जाता है, जिससे पूरा मामला और पेचीदा हो जाता है। जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर देव (असरानी) और इंस्पेक्टर राणा (भंवर सिंह पुंडीर) को सौंपी जाती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, कई रहस्य सामने आते हैं और हत्याओं का सिलसिला भी जारी रहता है। फिल्म का क्लाइमेक्स चौंकाने वाला है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है। कहानी में गंभीर सस्पेंस के साथ-साथ ड्रामा और हल्के-फुल्के कॉमिक पल भी शामिल हैं, जो इसे पूरी तरह भारी-भरकम होने से बचाते हैं।

PunjabKesari

अभिनय
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत असरानी का अभिनय है। लंबे अनुभव के साथ वह हर दृश्य में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। उनके संवाद, भाव और स्क्रीन प्रेजेंस कई सीन को प्रभावशाली बना देते हैं। यह फिल्म उनके लंबे सिनेमाई सफर को याद करने का एक भावनात्मक अवसर भी देती है। भंवर सिंह पुंडीर ने इंस्पेक्टर राणा के किरदार को गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ निभाया है। कई दृश्यों में उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत नजर आती है और वह अपनी छाप छोड़ने में सफल रहते हैं। मिलिंद गुनाजी अपने किरदार में सहज दिखाई देते हैं, जबकि जरीना वहाब हमेशा की तरह सधी हुई और प्रभावी लगती हैं। मुश्ताक खान अपनी कॉमिक टाइमिंग से हल्के-फुल्के और मनोरंजक पल जोड़ते हैं। अन्य कलाकार भी अपने-अपने हिस्से का काम ईमानदारी से निभाते हैं।

PunjabKesari

निर्देशन
युवा निर्देशक राकेश सावंत ने इस फिल्म को एक कमर्शियल एंटरटेनर के रूप में पेश किया है। उन्होंने मर्डर मिस्ट्री, ड्रामा और कॉमेडी को संतुलित करने की कोशिश की है। साथ ही फिल्म असरानी जैसे दिग्गज कलाकार को एक तरह से श्रद्धांजलि भी देती हुई महसूस होती है। निर्देशन के स्तर पर राकेश सावंत काफी हद तक दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहते हैं। उत्तराखंड की खूबसूरत लोकेशंस फिल्म की विजुअल अपील को और बेहतर बनाती हैं और कहानी को एक अलग माहौल देती हैं।

PunjabKesari


कुल मिलाकर ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ एक मसाला एंटरटेनर फिल्म है, जिसमें सस्पेंस, ड्रामा और कॉमेडी का अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है। अगर आप मर्डर मिस्ट्री पसंद करते हैं और असरानी को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक भावनात्मक और मनोरंजक अनुभव साबित हो सकती है।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!