Review: अपराध, पश्चाताप और अंतरात्मा की कहानी है संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की वध 2

Updated: 05 Feb, 2026 01:41 PM

sanjay mishra and neena gupta starrer vadh 2 movie review

वध 2’ हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से है जो बिना ज्यादा शोर-शराबे, बिना किसी गाने के अपनी कहानी और अभिनय के दम पर दर्शकों को बांधे रखती है।

फिल्म: वध 2 (Vadh 2)
कलाकार: संजय मिश्रा (Sanjay Mishra), नीना गुप्ता (Neena Gupta) , कुमुद मिश्रा (Kumud Mishra), योगिता बिहानी (Yogita Bihani), अक्षय डोगरा (Akshay Dogra)
निर्देशक: जसपाल सिंह संधू (Jaspal Singh Sandhu)
रेटिंग:  3.5/5


वध 2 फिल्म रिव्यू : 
वध 2’ हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में से है जो बिना ज्यादा शोर-शराबे, बिना किसी गाने के अपनी कहानी और अभिनय के दम पर दर्शकों को बांधे रखती है। यह फिल्म केवल एक क्राइम थ्रिलर नहीं है, बल्कि समाज, नैतिकता और इंसान की मानसिक स्थिति पर गहरा सवाल भी उठाती है। ‘वध’ के पहले भाग की तरह, इसका दूसरा भाग भी सस्पेंस और भावनात्मक गहराई से भरा हुआ है। पूरी फिल्म धीरे- धीरे चलती रहती है और आपको कहीं जरा भी बोरियत महसूस नहीं होती बल्कि आप उसमें बंधे रहते हैं।

कहानी

‘वध 2’ की कहानी एक जेल के अंदर सेट है, जहां नीना गुप्ता एक बंदी है और संजय मिश्रा एक पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म की शुरुआत से ही एक दूसरे कैदी के रहस्यमयी गायब हो जाने के इर्द-गिर्द सस्पेंस बनता है। 

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इसकी कहानी बदले, अपराध और न्याय के बीच उलझे हुए किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म की शुरुआत शांत माहौल से होती है, लेकिन धीरे-धीरे कहानी परत-दर-परत खुलती जाती है।कहानी का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि यह दर्शकों को पहले से कुछ भी मानकर चलने नहीं देती। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे किरदारों के अतीत, उनके फैसले और उनके डर सामने आते हैं। क्लाइमेक्स न केवल चौंकाता है, बल्कि लंबे समय तक दिमाग में बना रहता है।

अभिनय
फिल्म का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसमें एक से बढ़कर एक कलाकारों की उपस्थिति है। संंजय मिश्रा और नीना गुप्ता ने तो ऐसा अभिनय किया है कि आप किसी और पर ज्यादा ध्यान दे ही नहीं पाएंगे उन्हीं दोनों के सीन्स में खोए रहेंगे। उनके चेहरे के भाव, संवाद अदायगी और बॉडी लैंग्वेज हर चीज किरदार को जीवंत बनाती है। सहायक कलाकारों ने भी फिल्म को मजबूती दी है। 

 

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निर्देशन
निर्देशक ने फिल्म को बेहद संतुलित तरीके से संभाला है। उन्होंने कहानी को न तो बेवजह खींचा और न ही जल्दबाजी दिखाई। हर सीन का एक उद्देश्य है और वह कहानी को आगे बढ़ाता है। सस्पेंस को बनाए रखना आसान काम नहीं होता, लेकिन ‘वध 2’ में निर्देशक इस परीक्षा में सफल रहते हैं। 

कुल मिलाकर, ‘वध 2’ एक प्रभावशाली, सोचने पर मजबूर करने वाली और सशक्त थ्रिलर फिल्म है। यह उन दर्शकों के लिए है जो मसाला और शोर-शराबे से हटकर, गंभीर और अच्छा कंटेंट सिनेमा देखना पसंद करते हैं। 

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